इसके बाद ही बकाएदार विभागों की सूची फाइनल होगी। बता दें, वाणिज्यकर विभाग लेन-देन या फिर अन्य मदों में वसूली करने वाले सरकारी विभागों से पहले वैट लेता था और अब जीएसटी वसूल रहा है। मगर सरकारी विभागों की स्थिति यह है कि वे आम लोगों से जीएसटी ले रहे हैं, लेकिन वाणिज्य कर विभाग को इसका भुगतान नहीं कर रहे हैं।
एक करोड़ से अधिक बकाया वाले विभाग
खाद्य एवं रसद, वस्त्रोद्योग एवं हथकरघा, ऊर्जा, लोक निर्माण, राजकीय निर्माण निगम, समाज कल्याण निर्माण निगम, राज्य सेतु निगम, खाद्य निगम, क्षेत्रीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय, सहकारिता, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान परिषद, सार्वजनिक उद्यम, कृषि, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, सिंचाई, जल संसाधन एवं परती भूमि विकास, नगर विकास, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, ग्राम्य विकास, बेसिक शिक्षा और पंचायती राज।