वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार, कहानीकार मनोहर श्याम जोशी को लखनऊ विश्वविद्यालय ने उनके शोधपत्र के लिए ‘कल का वैज्ञानिक’ घोषित किया था। इसका किस्सा काफी मजेदार है। प्रदेश सरकार में उस समय शिक्षा मंत्री डॉ. संपूर्णानंद थे। उन्होंने प्रत्येक विश्वविद्यालय से एक-एक ‘कल का वैज्ञानिक’ चुनने और उसे 200 रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की।
‘लखनऊ मेरा लखनऊ’ पुस्तक के संस्मरण से पता चलता है, ‘उन्होंने उन पुस्तकों को पढ़कर उनके तथ्यों पर शोध लिख डाला और उस पर एक निहायत साहित्यिक शीर्षक जड़ दिया, ‘रोमांस ऑफ द इलेक्ट्रॉन्स।’ अपने एक साथी की मदद से उस पर सुंदर चित्र बनवा लिए।
पर, इसकी एवज में उन्हें अपने उस साथी को कुछ दिनों के लिए अपनी रेसिंग साइकिल देनी पड़ी। तमाम शोधपत्र पढ़ने के बाद निर्णायक प्रोफेसर साहब ने दो शोध पसंद किए। एक जोशी जी का और दूसरा एक अन्य लड़के का जो आगे चलकर बड़ा वैज्ञानिक बना तथा अमेरिका में काफी नाम कमाया।