मोहनलालगंज कोतवाली में बैठे उस दुबले-पतले शख्स का शरीर कांप रहा था। चेहरा दर्द, चिंता, उलझनों और अबूझ सवालों से बोझिल हो चुका था। मन कहीं खोया हुआ था।
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रह-रहकर आंखें भीग जाती थीं। रुलाई रोकने की कोशिश में कई बार चेहरा दोनों हथेलियों से ढक लिया। डीआईजी नवनीत सिकेरा ने उनसे बातचीत शुरू की तो आंखों से आंसुओं का सैलाब निकल गया। बोले, ‘ऐसा क्यों हो गया?’
यह शख्स बलसिंहखेड़ा प्राथमिक विद्यालय में दरिंदगी की शिकार युवती के पिता हैं। उन्होंने बताया कि बेटी हिम्मत हारने वाली नहीं थी। छह साल पहले पति की मौत के बाद से वह अकेले ही बच्चों को संभाल रही थी। बोले-ससुरालवालों ने भी मुंह मोड़ लिया।
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उसने देख थे कुछ ख्वाब...
बेटी के लिए जिंदगी का एक-एक दिन बड़ा मुश्किल था। फोन पर वह अपनी तकलीफों का जिक्र करती तो कलेजा मुंह में आ जाता।
अक्सर वह बेटी से सबकुछ छोड़कर घर आने की बात कहते थे, तो बेटी उनसे सिर्फ जमाने से लड़ने का हौसला और आशीर्वाद मांगती थी।
कहती थी, ‘कुछ सपने हैं, जिन्हें पूरा करना है।’
बचपन से ही थी जुझारू
बातचीत के दौरान जब लहूलुहान बेटी की जीजिविषा के बारे में चर्चा शुरू हुई तो उन्होंने बताया कि बचपन से ही बहुत जुझारू थी। बड़ी होने के नाते उस पर जिम्मेदारियां ज्यादा थीं।
विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाए वह हिम्मत से काम लेती थी। उन्होंने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, इसलिए बेटी की शादी जल्दी कर दी थी।
उसने इंटर तक की पढ़ाई की थी। पिता ने बताया कि दो माह पूर्व परिवार में एक शादी के सिलसिले में वह घर आई थी। इसके बाद से उससे सिर्फ फोन पर ही बातचीत हो रही थी।
पति को दे दी थी किडनी
युवती के पिता ने बताया कि वह देवरिया में शिक्षण कार्य करते हैं। युवती उनके तीन बच्चों में बड़ी थी। उसकी शादी 15 साल पहले देवरिया में ही हुई थी।
युवक राजधानी के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में संविदा पर नौकरी करता था। उसके 13 साल की बेटी और छह साल का बेटा है। दामाद की किडनी खराब थीं। बेटी ने अपनी एक किडनी पति को दे दी थी।
छह साल पहले दामाद की मौत हो गई। उसकी जगह बेटी को अस्पताल में नौकरी दे दी गई। वह दोनों बच्चों के साथ किराए के मकान में रहती थी।
उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर बेटी के घर न आने की जानकारी पाकर वह राजधानी पहुंचे। देर रात बेटी के साथ हुई हैवानियत की जानकारी मिली तो सदमा सा लग गया।
नातिन की आवाज सुन भर आया गला
थाना में बैठे युवती के पिता ने नाती-नातिन का हालचाल लेने के लिए फोन लगाया तो माहौल गमगीन हो गया। नातिन की आवाज सुनते ही उनका गला भर आया।
बस मुंह से यही निकला, ‘गुड़िया तुम ठीक हो। कोई परेशानी तो नहीं।’ इसके बाद आंखों से झर-झर आंसू बहने लगे। उनकी यह हालत देखकर डीआईजी भी भावुक हो गए।
लखनऊ के मोहनलाल गंज में गैंगरेप के बाद जान गंवाने वाली युवती के गांव के लोग पूरे घटनाक्रम को लेकर अवाक हैं।
देवरिया जिले के गौरीबाजार क्षेत्र के इस गांव में शुक्रवार सुबह घटना का पता चला तो हर कोई सन्न रह गया। गांव के लोगों ने बताया कि पांच साल पहले बीमारी से पति की मौत हो जाने के बाद मृतक आश्रित के रूप में उसे लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई में नौकरी मिल गई थी। वही पूरे घर का खर्च चलाती थी।
लखनऊ में ही बेटे और बेटी की पढ़ाई कराने के कारण, उसका गांव आना कम होता था। गांव वालों की चर्चा में दोनों बच्चों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे।