मुलायम सिंह यादव (फाइल)
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नेताजी ने कहा था कि सहमति से या न्यायालय से बनेगा राममंदिर
पूर्व विधायक जयशंकर पांडेय ने बताया कि मुलायम सिंह ने कहा था कि राममंदिर का निर्माण या तो दोनों पक्षों की सहमति से होगा या न्यायालय के फैसले से होगा। यह उनका पहला वाक्य था और यही अंतिम वाक्य भी हो गया। उन्होंने देश में सांप्रदायिकता के रथ को रोका। अयोध्या में बड़े खून-खराबे को रोका। सांप्रदायिकता को रोकने के लिए उन्होंने कुर्सी तक त्याग दी। कहा कि तभी नारा लगता था कि जिसने कभी न झुकना सीखा उसका नाम मुलायम है।
सरकार रही तो हेलीकॉप्टर से नहीं तो कार से आएंगे
पूर्व विधायक जयशंकर पांडेय ने बताया कि उनकी बेटी की शादी 1994 में थी। उस समय मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे, लेकिन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की बात चल रही थी। उन्होंने नेताजी को बेटी की शादी में आमंत्रित किया तो वहां मौजूद लोगों ने कहा कि सरकार नहीं रही तो कैसे चलेंगे। इस पर मुलायम सिंह ने जवाब दिया कि यदि सरकार रहेगी तो हेलीकॉप्टर से आएंगे और नहीं रहेगी तो कार से चलेंगे। हालांकि, सरकार बच गई और वह हेलीकॉप्टर से तमाम नेताओं के साथ उनके घर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे।
डीएम ने निरस्त करवा दिया कार्यक्रम, फिर भी पहुंचे
सपा के वरिष्ठ नेता छेदी सिंह ने बताया कि वर्ष 2006 में बार एसोसिएशन का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा था। कचहरी में बने अधिवक्ताओं के चैंबर का उद्घाटन भी किया जाना था। कार्यक्रम में मुलायम सिंह यादव को आमंत्रित किया था। उनका कार्यक्रम तय हो गया था, लेकिन इस बीच तत्कालीन जिलाधिकारी ने देर रात में फैक्स भेजा कि यहां पर आने से स्थिति खराब हो जाएगी। सरकारी कार्यक्रम निरस्त हो गया। छेदी सिंह ने बताया कि इसके बाद नेताजी ने जिलाधिकारी को फोन किया और कहा कि मैं निश्चित तौर पर आऊंगा। सरकारी कार्यक्रम निरस्त होने के बावजूद भी वह अगले दिन आए और काफी देर तक रहे। कचहरी को तमाम सौगात भी दीं।
1977 में संपर्क में आए अवधेश तो हमेशा मिली तवज्जो
प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार बनने पर पहली बार जिले के कद्दावर नेता अवधेश प्रसाद मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आए। उस दौरान मुलायम सिंह सहकारिता मंत्री बने और अवधेश प्रसाद को सूचना एवं सामान्य राज्यमंत्री बनाया गया। जब बाबू बनारसी दास मुख्यमंत्री बने तब भी वह दोनों लोग साथ में ही मंत्री रहे। अवधेश प्रसाद बताते हैं कि 1989 में गोरखपुर के कद्दावर नेता रहे ओमप्रकाश पासवान के सहयोग से 18 विधायकों को ले जाकर मुलायम सिंह को सौंपा और सरकार बन गई। इसके बाद से मुलायम सिंह यादव से घनिष्ठता हुई, जो कि आजीवन प्रगाढ़ रही।
मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
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गौहनियां में मौरंग बिछाकर उतारा गया हेलीकॉप्टर
पूर्व मंत्री अवधेश प्रसाद बताते हैं कि अपने लोगों के प्रति उनमें अटूट प्रेमभाव था। समर्थकों के मान-सम्मान के लिए वह किसी भी हद तक जाते थे। बताया कि मसौधा के गौहनियां में जीजीआईसी का शिलान्यास होना था, जिसमें बतौर मुख्य अतिथि मुलायम सिंह यादव को शामिल होना था। मौसम खराब था और सरकारी कार्यक्रम निरस्त होने वाला था, लेकिन वह फिर भी आए और दो ट्रॉली मौरंग बिछाकर हेलीकॉप्टर उतारा गया।
सामान्य से कार्यकर्ता को भी देते थे मौका
विधान परिषद सदस्य रही लीलावती कुशवाहा ने बताया कि 1989 में वह नेताजी के संपर्क में आईं। उस समय वह लोकदल की महिला जिलाध्यक्ष थीं। 1992 में जब सपा का गठन हुआ तो उन्हें मुलायम सिंह ने जिले का महिला सभा का अध्यक्ष बनाया। तब से वह 17 साल तक जिलाध्यक्ष रहीं। 2007 में उन्हें महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। 2012 में सरकार बनी तो उन्हें महिला कल्याण निगम की चेयरमैन भी बनाया गया। बाद में नेता जी ने अपने वादे को पूरा करते हुए उन्हें एमएलसी बनाया। कहा कि नेताजी जुबान के पक्के थे, जिससे जो भी वादा किया, निभाते जरूर थे। कहा कि 2007 में जब उनकी बेटी की शादी थी तो वह बिना बताए सीधे दिल्ली से आ गए, करीब दो घंटे तक वह रहे।
सामान्य परिवार के बेटे को मंत्री तक बनाया
उन्हीं की पाठशाला के एक और शिष्य रहे पवन पांडेय। पवन पांडेय मूलरूप से पूरा ब्लॉक के कृष्णापुर के निवासी हैं। उनके पिताजी एक मामूली नौकरी करते थे। पवन पांडेय लखनऊ विवि से छात्र राजनीति में चले गए। वहां पर उनके मामा पूर्व विधायक जयशंकर पांडेय के साथ उन्हें सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव का सानिध्य मिला। तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय बताते हैं कि 2012 में वह क्षण मेरे लिए अचंभित करने वाला था, जब मेरे जैसे सामान्य परिवार के बेटे को नेताजी ने आशीर्वाद दिया और अखिलेश यादव से कहा कि अयोध्या से पवन चुनाव लड़ेगा। कहा कि पवन, जीतने के बाद अयोध्यावासियों की सेवा करना। मैं चुनाव जीत गया। उन्हीं के आशीर्वाद से राज्यमंत्री भी बना। कहा कि नेताजी न होते तो आज मेरा वजूद न होता।
क्रांति रथ लेकर अयोध्या पहुंचे थे मुलायम
1988 में जब मुलायम सिंह यादव ने क्रांति रथे लेकर विकास यात्रा निकाली तो फैजाबाद उनका पहला पड़ाव था। इस दौरान अयोध्या के विभिन्न स्थलों पर सभाएं कीं। वह अपने चहेतों को भीड़ में पहचान लेते थे और उन्हें मान-सम्मान का पूरा ध्यान रखते थे।
1987 में सिक्कों से तौले गए थे मुलायम सिंह
जिले की अल्पसंख्यक बाहुल्य सीट रुदौली से नेताजी का संबंध पुराना रहा है। समाजवादी पार्टी की स्थापना से पहले पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के नेतृत्व वाली लोकदल के नेता के रूप में 1987 में वह सर्वप्रथम रुदौली आए थे। उस समय प्रथम चेयरमैन रहे चौधरी सईद मुस्तफा अली ने कस्बा रुदौली में उनका स्वागत किया था। विशाल जनसभा हुई। इस दौरान नेता जी को सिक्कों से तौलकर सम्मानित किया था। चौधरी सईद मुस्तफा अली के पुत्र एहसान मोहम्मद अली उर्फ चौधरी शहरयार ने बताया कि सिक्कों से तौल कर सम्मानित करने में उपयोग में ली गई राशि पार्टी फंड में नेता जी को सौंपी गई थी।