प्रदेश में चार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों को चौड़ा करने की योजना को तगड़ा झटका लगा है।
राज्य सरकार के स्टेट सपोर्ट एग्रीमेंट साइन न करने से ठेकेदारों ने निर्माण कार्य से हाथ खींच लिए हैं।
इनमें से दो की बिड वापस हो चुकी हैं, जबकि दो बिड वापसी की प्रक्रिया में हैं।
साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के इन प्रोजेक्ट्स के टेंडर डेढ़ साल पहले फाइनल हुए थे। अब इनके निर्माण के लिए नए सिरे से पूरी कवायद करनी पड़ेगी, जिसमें काफी वक्त लगेगा।
वर्ष-2012 में लखनऊ-सुल्तानपुर, अलीगढ़-कानपुर, आगरा-इटावा और मेरठ-बुलंदशहर हाईवे को चौड़ा करने के लिए ठेका दिया गया।
ये सभी काम बीओटी (बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) मॉडल पर होने थे।
शर्त के मुताबिक, ठेकेदारों को सभी संबंधित विभागों की एनओसी और राज्य सरकार से एसएसए (स्टेट सपोर्ट एग्रीमेंट) साइन कराकर देने की जिम्मेदारी एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की होती है।
लेकिन डेढ़ साल में भी ये कागजी कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई। वन विभाग से पेड़ काटने के लिए एनओसी मिल भी गई, मगर एसएसए पर मामला अटक गया।
राज्य सरकार ने एसएसए साइन करने से इन्कार कर दिया। राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्रालय का मानना है कि एसएसए के तैयार प्रोफार्मा में ठेकेदारों के हित कुछ ज्यादा ही हावी हैं। लेकिन एनएचएआई इस प्रोफार्मा में किसी तरह के बदलाव के लिए तैयार नहीं है।
खटाई में पड़े प्रोजेक्ट
लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे (एनएच-56)
अलीगढ़-कानपुर हाईवे (एनएच-91)
आगरा-इटावा हाईवे (एनएच-2)
मेरठ-बुलंदशहर हाईवे (एनएच-235)