लखनऊ। रूमी दरवाजे के रास्ते को पत्थर का खंभा लगाकर बंद करने से मुहर्रम के दिनों में निकलने वाले परंपरागत जुलूसों को लेकर असमंजस बना हुआ है। ऐसे में हुसैनाबाद ट्रस्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को पत्र भेजकर रूमी दरवाजा खोलने की मांग की है।
मुहर्रम के महीने का आगाज चांद के हिसाब से 27 या 28 जून से हो रहा है। हुसैनाबाद एवं संबद्ध ट्रस्ट की ओर से मुहर्रम की पहली तारीख को परंपरागत शाही मोम की जरीह और सात तारीख को शाही मेहंदी का जुलूस बड़ा इमामबाड़ा से रूमी दरवाजा, सतखंडा होते हुए छोटा इमामबाड़ा तक निकाला जाता है।
वहीं, शिया समुदाय की ओर से मुहर्रम की आठ तारीख को दरिया वाली मस्जिद से जुलूस निकाला जाता है। जुलूस बड़ा इमामबाड़ा, रूमी दरवाजा, रूमी गेट चौराहा, चरक चौराहा होते हुए गुफरानमआब इमामबाड़ा पहुंचकर संपन्न होता है। मौजूदा समय में रूमी दरवाजे के रास्ते को पत्थर का पोल लगाकर बंद किया गया है। हुसैनाबाद ट्रस्ट के प्रभारी अधिकारी एवं अपर नगर मजिस्ट्रेट पंचम मनोज कुमार सिंह ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षण पुरातत्वविद को पत्र भेजकर जुलूसों के लिए रूमी दरवाजा खोलने की मांग की है।