विवादित गर्भगृह पर राम मंदिर निर्माण के लिए रामघाट इलाके में 30 अगस्त 1990 को भूमि पूजन कर दो कार्यशालाएं खोली गई थी। इसी के साथ राजस्थान में भी तीन कार्यशालाएं खोली गईं।
यहां राजस्थान से आने वाले पत्थरों से मंदिर निर्माण की शिलाएं तराशी का काम अनवरत चल रहा था। लेकिन अब सब जगह काम बंद है, कारीगरों को छुट्टी दे दी गई है। जबकि बाबरी ढांचा गिरने के बाद आरएसएस व उससे जुड़े संगठनों पर छह माह प्रतिबंध में भी यहां तराशी का काम नहीं रुक पाया था।
सपा-बसपा की सरकारों में विहिप-बजरंग दल के तमाम कार्यक्रमों पर प्रतिबंध के दौरान भी राजस्थान से पत्थर आते रहे और तराशी का कार्य चलता रहा। अब तक लगभग सवा लाख घनफुट पत्थरों की तराशी का काम पूरा हो चुका है।
मामले पर जिलाधिकारी अनुज कुमार झा का कहना है कि जिले में धारा 144 लागू है, आपसी सद्भाव बना रहे इसके लिए हर पहल का स्वागत होना चाहिए। प्रशासन ने न उन्हें पत्थर तराशी के लिए कभी इजाजत दी थी, न बंद करने का आदेश जारी किया है।
वैसे निषेधाज्ञा के तहत आदेश जारी है कि कोई व्यक्ति या समूह व संगठन रामजन्मभूमि व बाबरी मस्जिद से जुड़े समारोह, पदयात्रा, जनसभा नहीं करेगा। बैनर-पोस्टर का भी इस्तेमाल नहीं करेगा।