यूपी के कई जिलों में एसटीएफ और पुलिस अधिकारी बनकर लूटपाट करने वाले गिरोह का मंगलवार को एसटीएफ ने पर्दाफाश किया। गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं। पकड़े गए लुटेरों ने आठ अगस्त को लोहिया पार्क के पास एक चिकित्सक को नोट बदलने का झांसा देकर बुलाया था और उनसे लूटपाट की थी।
यूपी के कई जिलों में एसटीएफ और पुलिस अधिकारी बनकर लूटपाट करने वाले गिरोह का मंगलवार को एसटीएफ ने पर्दाफाश किया। गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं। पकड़े गए लुटेरों ने आठ अगस्त को लोहिया पार्क के पास एक चिकित्सक को नोट बदलने का झांसा देकर बुलाया था और उनसे लूटपाट की थी। मामले में गोमतीनगर थाने में मुकदमा दर्ज है।
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गिरोह ने हाल ही में कृष्णानगर इलाके में सिपाही के साथ मिलकर 10 लाख रुपये की हेराफेरी की थी। एडीजी एसटीएफ अमिताभ यश के मुताबिक डिप्टी एसपी अवनीश्वर चंद्र श्रीवास्तव की टीम ने तीन शातिर लुटेरों को बीबीडी बैडमिंटन अकादमी के पास से गिरफ्तार किया है। इनमें फतेहपुर के मुल्लनपुर निवासी राशिद अहमद उर्फ अजय शर्मा, सिक्किम के चिसोपानी का विजय प्रधान और गोंडा के मनकापुर जलालपुर का अजीत मौर्य शामिल है।
अजीत जिला पंचायत सदस्य भी रह चुका है। तीनों ने गोमतीनगर निवासी डॉ. पार्थ प्रतिम से 6 लाख रुपये की लूट की थी। तीनों ने डॉ. पार्थ को 6 लाख रुपये के दो हजार व पांच सौ रुपये के नोट के बदले में 7.20 लाख रुपये 20 और 50 रुपये के नोट देने का झांसा देकर लोहिया पार्क के पास बुलाया था। डॉ. पार्थ के पहुंचने के बाद वहां गिरोह के कुछ सदस्य एसटीएफ के कर्मचारी बनकर पहुंचे और उनसे रुपये लूटकर फरार हो गए।
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डॉ. पार्थ ने एसटीएफ में तैनात अपने एक परिचित अधिकारी को सूचना दी तो इनकी पोल खुली। इसके बाद एसटीएफ ने तीनों की तलाश शुरू की और मंगलवार को बीबीडी अकादमी के पास दबोच लिया। आरोपियों के पास से 6 मोबाइल, 4.32 लाख रुपये कैश, एक बाइक व एक सफारी बरामद हुई।
जिला पंचायत सदस्य बनने के बाद भी करता रहा लूट
गिरफ्तार किए गए आरोपी
- फोटो : amar ujala
डिप्टी एसपी अवनीश्वर चंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक गिरोह का सरगना व मास्टर माइंड राशिद उर्फ अजय शर्मा है। वहीं गिरोह का सबसे शातिर सदस्य अजीत मौर्य है। अजीत गोंडा के मनकापुर से जिला पंचायत सदस्य भी रहा। जनप्रतिनिधि बनने के बाद भी वह लूट व टप्पेबाजी में सक्रिय रहा। राशिद से मिलने के बाद उसने अपराध जगत में तेजी से कदम बढ़ाया।
डिप्टी एसपी के मुताबिक इस गिरोह का नेटवर्क मुंबई, दिल्ली, गुजरात, बिहार, झारखंड, हरियाणा जैसे प्रदेशों में फैला है। इसके एजेंट व्यापारियों, चिकित्सकों, सीए व बिल्डरों को शिकार बनाते हैं। उन्हें रुपये बदलने का झांसा देकर जाल में फंसाते हैं, फिर लूटपाट कर फरार हो जाते हैं।
बनारस के व्यापारी को भी बनाया था शिकार
एसटीएफ के मुताबिक आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वाराणसी के कारोबारी राजेंद्र सिंह को बड़ी नोट के बदले छोटी नोट देने का झांसा देकर ठगी की थी। 15 अगस्त को अपने एजेंट संतोष जायसवाल के जरिए कारोबारी को बुलाया। उन्हें बड़े नोट को 20 प्रतिशत कमीशन पर बदलने का झांसा देने के बाद 32 हजार रुपये छीनकर भाग गए थे। आरोपियों ने कानपुर के जार्जमऊ इलाके में भी 10 लाख व 5 लाख रुपये की ठगी व लूट के वारदात को अंजाम दिया था। गिरोह के खिलाफ लखनऊ में मोहनलालगंज, पीजीआई, कृष्णानगर, गोमतीनगर में पांच मुकदमे दर्ज हैं।
अजीत मौर्य 26 मई को कृष्णानगर इलाके में हुई कारोबारी से 10 लाख की हेराफेरी का आरोपी है। 26 मई को विजयनगर चौकी में तैनात सिपाही देवेश के साथ उसने एक कारोबारी से 10 लाख रुपये साफ कर दिए। इस मामले में मुकदमा दर्ज करने के साथ सिपाही को तत्काल निलंबित कर दिया गया था। वहीं अजीत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। विवेचक के मुताबिक कोराना काल में उसे जेल से उसे 25 अगस्त तक की पैरोल मिली थी। इस दौरान उसने कई वारदातों को अंजाम दिया।
जाली नोट के कारोबार में भी दबोचा गया
अजीत मौर्य मोहनलालगंज से 10 हजार रुपये का इनामी भी रह चुका है। उसे 28 अक्तूबर 2020 को मोहनलालगंज पुलिस ने तीन साथियों संग दबोचकर फर्जी नंबर प्लेट, 8 मोबाइल, 100 रुपये की तीन गड्डी, लग्जरी गाड़ी बरामद की थी। अजीत के साथ अनिल मौर्य, भुखाली पकड़ा गया था। अजीत 30 प्रतिशत के कमीशन पर दिल्ली से नकली नोट खरीदता था।