एसटीएफ ने राष्ट्रीय खाद्य एवं बीज भंडारण परिषद की फर्जी वेबसाइट बना नौकरी का विज्ञापन देकर ठगी करने वाले गिरोह के सरगना समेत तीन सदस्यों को दबोच लिया। शातिर ठग लखनऊ में इंदिरानगर के सेक्टर-सी में ऑफिस खोलकर लोगों से ठगी कर रहे थे।
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बुधवार को ठगी के शिकार गोसाईंगंज के अहिमामऊ निवासी हर्ष देव पांडेय ने गाजीपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके बाद एसटीएफ ने कार्रवाई की। एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने बताया कि पकड़े गए ठग बलिया के दोकटी कृष्णपुरा निवासी संदीप मिश्रा, राज कुमार मिश्रा और वाराणसी के दशाश्वमेघ गोदौलिया के हौज कटोरा निवासी आलोक मिश्रा हैं।
संदीप गिरोह का सरगना है और इंदिरानगर में सी ब्लॉक में रहता था। राज कुमार मिश्रा उसके साथ रहता था, जबकि आलोक मिश्रा आशियाना के रजनीखंड में किराए के मकान में रह रहा था। तीनों सरकारी विभाग राष्ट्रीय खाद्य एवं बीज भंडारण परिषद से मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर ठगी कर रहे थे।
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वेबसाइट में शातिरों ने विभिन्न पदों के लिए नौकरी का विज्ञापन दिया। आवेदकों से ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण कराकर विभिन्न बैंक खातों में मोटी रकम जमा कराई। फर्जी वेबसाइट से ठगी की सूचना मिलने पर अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह को छानबीन में लगाया गया था।
पंजीकरण का 1100 व नियुक्ति पत्र का लेते थे पांच लाख रुपये
डेमो
- फोटो : डेमो
इस बीच ठगी के शिकार हर्ष देव पांडेय ने गाजीपुर थाना में फर्जी वेबसाइट संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी। एसटीएफ की टीम इंदिरानगर के सेक्टर-19 स्थित ठगों के ठिकाने पर पहुंची तो वहां संदीप, आलोक और राजकुमार मिल गए। तीनों को गिरफ्तार कर गाजीपुर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है।
अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि ठगों के कार्यालय से राष्ट्रीय खाद्य एवं बीज भंडारण परिषद से संबंधित पुस्तकें व प्रपत्र, प्रशिक्षण का एक रजिस्टर, तीन मोबाइल, कंप्यूटर, सात अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड, दो पैन कार्ड, एक प्रिंटर, सात आवेदन पत्र, आठ पोस्टकार्ड, तीन शपथ पत्र, आठ डिब्बा बीज के नमूने, विजिटर कार्ड, एक पासबुक, दो चेकबुक, दो मोहर, दो आधार कार्ड, दो ड्राइविंग लाइसेंस समेत अन्य सामान बरामद हुआ है।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ठग प्रत्येक आवेदक से पंजीकरण के नाम पर 1100 रुपये जमा कराते थे। परीक्षा व प्रशिक्षण शुल्क के नाम पर प्रत्येक आवेदक से बीस हजार रुपये लिए जाते थे। नियुक्ति पत्र देने के लिए सबसे पांच लाख रुपया मांगा जाता था। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन व ऑफ लाइन सैकड़ों लोगों ने ठगों को करोड़ों रुपये दिए हैं।
ठग संदीप मिश्रा ने बताया कि उसने एमएससी के बाद एमबीए किया है और पूर्वांचल विश्वविद्यालय से एलएलबी भी किया है। इसके अलावा उसने यूपीटीयू से कंप्यूटर कोर्स किया है। संदीप ने कोलकाता निवासी चचेरे भाई से फर्जी वेबसाइट बनवाई थी।
ठगी के शिकार हर्ष देव पांडेय ने बताया कि वह इलाके में ही रहने वाले दोस्त श्रवण कुमार के साथ करीब तीन महीने पहले पॉलीटेक्निक चौराहे पर राजकुमार मिश्रा से मिला था। राजकुमार ने बताया कि उसका भाई संदीप राष्ट्रीय खाद्य एवं बीज भंडारण परिषद से संबंधित वेबसाइट चलाता है, जिसमें विभिन्न पदों की नौकरी निकली हैं। हर्ष व श्रवण महीनेभर पहले नौकरी के लिए उसके कार्यालय पहुंचे तो देखा कि आलोक मिश्रा युवक-युवतियों को कृषि से संबंधित प्रशिक्षण दे रहा है।
हर्ष ने बताया कि संदीप ने कहा उक्त कार्यालय नीति आयोग से संबद्ध है व कृषि विभाग का स्थायी कार्यालय है। हर्ष व श्रवण ने मछलीशहर जौनपुर निवासी राजेश, आबिद, माया देवी और दीपक कमलेश के 7700 रुपये देकर पंजीकरण कराया और परीक्षा व प्रशिक्षण के लिए 1.40 लाख रुपये ठगों के बैंक खाते में जमा कराए। हालांकि उन्हें नौकरी नही मिली।
इन्होंने भी कराया पंजीकरण
- सत्येंद्र राजभर पुत्र तीजा राजभर सराय हैजरगंज थाना मदाह, गाजीपुर
- अनुज कुमार पुत्र महेंद्र सिंह मेद्यावाला थाना जसपुर, उद्यमसिंहनगर
- सुनील कुमार सिंह पुत्र श्याम सिंह चकरपुर थाना बाजपुर, उद्यमसिंहनगर
- ज्ञान चंद प्रजापति पुत्र मायाराम प्रजापति छितलूपुर थाना सम्बूलानगर, बलरामपुर
- हरविंदर सिंह पुत्र निहाल सिंह मछुआ डाबरा थाना जसपुरा, उद्यमसिंहनगर
- राजकुमार पुत्र फूसा सिंह मछुआ डाबरा थाना जसपुर, उद्यमसिंहनगर
- अशोक कुमार पुत्र मोतीलाल नंदना थाना अतरौलिया आजमगढ़
- राकेश कुमार पुत्र मकरंद निवासी त्रिवेणीनगर हसनगंज