हादसे का शिकार हुई फरक्का एक्सप्रेस (फाइल फोटो)
हरचंदपुर में न्यू फरक्का दुर्घटना मामले की जांच शुक्रवार से उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम दफ्तर में शुरू हो गई। रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) एसके पाठक ने हादसे से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल की। पहले दिन लोको पायलट, सहायक लोको पालयट, गार्डों और सिग्नल से जुड़े रेलकर्मियों के बयान लिए गए।
न्यू फरक्का एक्सप्रेस बीते बुधवार की सुबह हरचंदपुर में हादसे का शिकार हो गई थी। मामले की जांच के निर्देश चेयरमैन रेलवे बोर्ड अश्विनी लोहानी ने दिए थे। शुक्रवार को हादसे से जुड़े 28 कर्मचारियों को डीआरएम दफ्तर बुलाया गया था। ट्रेन के लोको पायलट रामजी चौरसिया ने बताया कि उसे एडवांस, स्टार्टर और होम तीनों ही सिग्नल मेन लाइन के लिए ग्रीन मिले थे।
ट्रेन हरचंदपुर स्टेशन के करीब पहुंची तो गति 75 से 80 किमी प्रति घंटा थी। जैसे ही यह अहसास हुआ कि ट्रेन गलत लाइन पर आ गई है तो ब्रेक लगाने शुरू कर दिए। लेकिन इस दौरान कई बोगियां पटरी से उतर चुकी थीं। मैंने तुरंत इसकी सूचना कंट्रोल रूम को दी।
सहायक लोको पायलट संदीप रंजन और गार्ड नरेंद्र वर्मा के बयान भी दर्ज हुए। इसी क्रम में रूट पर न्यू फरक्का एक्सप्रेस से ठीक पहले गुजरी इलाहाबाद-हरिद्वार एक्सप्रेस और प्रयाग-बरेली एक्सप्रेस के ड्राइवरों व गार्ड से भी पूछताछ हुई।
इनके बयान हुए दर्ज
मामले की जांच करते अधिकारी।
- फोटो : amar ujala
पहले दिन स्टेशन मास्टर आशीष सैनी, लोको पालयट रामजी चौरसिया, सहायक लोको पायलट संदीप रंजन, सिग्नल इंस्पेक्टर विनोद कुमार शर्मा, इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल मेंटेनर अमरनाथ, चीफ सिग्नल इंस्पेक्टर सौरभ सिंह और सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन के खलासी आनंद बाजपेयी के बयान दर्ज किए गए।
जांच के लिए मंगवाए उपकरण
स्टेशन के प्वाइंट में गड़बड़ी की बात उजागर हो रही है, इससे जुड़े उपकरणों को भी डीआरएम दफ्तर लाया गया है, जिसकी जांच की जाएगी। साथ ही पटरी का टूटा हुआ हिस्सा भी लाया गया है, जिसकी गुणवत्ता व फ्रैक्चर के एंगल से जांच होगी। इसके अतिरिक्त सिग्नल प्वॉइंट को सेट करने वाली लाइन व पटरी के कई अन्य टुकड़ों को भी लाया गया है, जिनकी टेस्टिंग आरडीएसओ की प्रयोगशालाओं में हो सकती है।