प्रदेश का हर संसदीय क्षेत्र और जिला राज्यमार्ग से जुड़ेगा। इसके लिए 67 राज्य मार्गों का चयन किया गया है। इनकी कुल लंबाई 5600 किलोमीटर है। यह जानकारी उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने गुरुवार को लखनऊ मंडल की 863 करोड़ रुपये लागत के 689 कार्यों के लोकार्पण के अवसर पर दी। उन्होंने 104 कार्यों का शिलान्यास भी किया, जिनकी कुल लागत 388 करोड़ रुपये है।
इस अवसर पर केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि नए घोषित राज्यमार्ग दो लेन (7 मीटर) या पेव्ड शोल्डर के साथ दो लेन (10 मीटर) बनाए जाएंगे। सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में दो-दो सेतुओं का निर्माण किया जाएगा। केशव ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार करीब 9745 मजरे और बसावटें ऐसी हैं, जो हर मौसम वाली सड़कों से नहीं जुड़ी हैं।
इनकी कुल लंबाई 8900 किमी है, जिनकी अनुमानित लागत 5350 करोड़ रुपये है। प्रथम चरण में करीब 1300 करोड़ रुपये की लागत से इन मजरों व बसावटों को सड़कों से जोड़ा जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 में भी मेधावी छात्रों के ग्राम व स्कूल को संपर्क मार्गों से जोड़ा जाएगा। इन मार्गों की कुल संख्या 86 है।
उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन से लेकर निगरानी तक का काम एप बनाकर किया जा रहा है। निविदाओं में पारदर्शिता लाने के लिए नया सॉफ्टवेयर लाया गया है। उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी के स्टैंडर्ड विजन डॉक्यूमेंट को विकास प्रहरी योजना के नाम से जाना जाएगा। इसे लखनऊ में सबसे पहले लागू किया जाएगा।
संपर्क मार्गों से जोड़े जाएंगे धार्मिक स्थल
केशव ने कहा कि प्रदेश में महत्वपूर्ण मार्गों के दोनों ओर स्थापित धार्मिक स्थलों को संपर्क मार्गों से जोड़ा जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैठने के लिए बेंच का निर्माण, छाया के लिए पेड़ लगाने और पीने की पानी की भी व्यवस्था की जाएगी।
नई तकनीक से 12 लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम किया
डिप्टी सीएम ने बताया कि वित्त वर्ष 2018-19 में लोक निर्माण विभाग ने सड़क निर्माण में नई तकनीक का प्रयोग करके 942 करोड़ रुपये की बचत की। 30 लाख घन मीटर पत्थर बचाया। जितना पत्थर बचाया, उससे गाजियाबाद से प्रयागराज तक 679 किलोमीटर लंबा दो लेन राज्यमार्ग बनाया जा सकता है। नई तकनीक के लिए यहां के इंजीनियरों को विशेषज्ञ संस्थानों से ट्रेनिंग भी दिलाई। खनन एवं ढुलाई की कमी से 12 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई गई।
माया-मुलायम के समय पुलों का निर्माण करा रहे हम
मौर्य ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और मायावती के समय जिन पुलों का शिलान्यास हुआ था, उसको भी हमारी सरकार पूरा कर रही है। रायबरेली में 15 वर्षों में जो काम नहीं हुआ, उससे ज्यादा काम बीजेपी सरकार ने ढाई वर्ष में किया है। 54 पुराने पुलों को बनाया है, जिन पर 1000 करोड़ से ज्यादा का खर्च आया।
उन्होंने बताया कि रोड सेफ्टी ऑडिट के लिए कानपुर और वाराणसी की आईआईटी को 118 करोड़ रुपये जारी कर दिया है। सात मीटर चौड़ी सड़क, चाहें ये किसी भी विभाग की हो, इन्हें ट्रांसफर करवाकर पीडब्ल्यूडी से निर्माण करवाया जाएगा। केशव ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर केंद्र में मोदी सरकार नहीं होती तो कश्मीर की समस्या का हल 100 वर्ष में भी नहीं निकल पाता।