लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। किसी भी छात्र के खाते में रकम भेजने से पहले एनआईसी उससे संबंधित डाटा की गहन जांच करेगी।
अगर किसी छात्रवृत्ति के नवीनीकरण आवेदन में नया आय प्रमाणपत्र लगाया है, तो उसे संदेहास्पद की श्रेणी में डाला जाएगा।
सभी नए और पुराने छात्रों के खाते में रकम भेजने के बाद पैसा बचने पर ही उनके नाम पर विचार होगा। संस्थान के स्तर से कोई घपला पकड़ में आने पर न सिर्फ उस संस्थान को काली सूची में डाला जाएगा, बल्कि उसकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
इस बाबत प्रमुख सचिव समाज कल्याण सुनील कुमार ने शासनादेश जारी कर दिया है। दरअसल नवीनीकरण वालों को पहले छात्रवृत्ति या शुल्क की भरपाई की जाएगी।
पर वर्ष 2013-14 में नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वालों के आय प्रमाण पत्र बताते हैं कि उनके परिवार की आमदनी पिछले साल से भी काफी घट गई है। इनकी तादाद हजारों में है।
2014 की नियमावली में हैं ये निर्देश
छात्रवृत्ति से संबंधित नियमावली-2014 में कहा गया है कि एक वर्ष से अधिक अवधि वाले पाठ्यक्रमों में आय प्रमाणपत्र केवल एक बार दाखिले के समय ही लिया जाएगा।
शासनादेश में कहा गया है कि नवीनीकरण के लिए पहले से कम आय का प्रमाणपत्र लगाने वाले छात्र-छात्राओं के ब्यौरे को एनआईसी की राज्य इकाई संदेहास्पद डाटा में डाल देगी।
संदेहास्पद डाटा वालों का नंबर सबसे आखिर में आएगा। जानकारों का कहना है कि तब तक पैसा बचेगा ही नहीं। इसलिए ऐसे विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति या शुल्क की भरपाई न हो पाना तय है।
इन्हें भी माना जाएगा संदिग्ध मास्टर डाटा में पाठ्यक्रम शामिल न होने पर माना जाएगा कि संबंधित शिक्षण संस्थान में वह पाठ्यक्रम चल ही नहीं रहा है।
संदिग्ध लोगों पर गिरेगी गाज
फीस रसीद संख्या और राशि न भरे होने की स्थिति में छात्र की प्रमाणिकता संदिग्ध मानी जाएगी। पिछली परीक्षा पास करने और वर्तमान कक्षा में दो वर्ष से ज्यादा का गैप होने पर भी संदेहास्पद माना जाएगा।
संदेहास्पद डाटा को जिले के लॉगइन पर विस्तृत जांच के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि आवेदन करने वाले छात्र ने उसी स्तर पर पहले तो छात्रवृत्ति या शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ तो नहीं लिया है।
इसके लिए एनआईसी को 2007 से उपलब्ध डाटा का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे तमाम मामले सामने आए हैं, जिनमें दूसरे संस्थान में पढ़ रहे विद्यार्थियों को भी अपने यहां पढ़ना दिखाया गया है।
ऐसे संस्थानों को काली सूची में डाला जाएगा। उसकी मान्यता रद्द करने के लिए भी जरूरी कार्यवाही की जाएगी। प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर का प्रावधान भी किया गया है।