मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने ड्रीम प्रोजेक्ट साइकिल ट्रैक पर पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के परीक्षण से संतुष्ट नहीं हैं। इस ट्रैक का लोकार्पण करने से पहले वे इसकी गुणवत्ता को पूरी तरह से परख लेना चाहते हैं।
इसलिए मंगलवार को हालैंड के विशेषज्ञ से उन्होंने ट्रैक का परीक्षण करवाया। इस परीक्षण में कुछ तकनीकी खामियां पाई गईं, जो निर्माण गुणवत्ता से नहीं बल्कि लेआउट से संबंधित हैं।
हालैंड की रॉयल हैस्कोनिंग डीएचवी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर विन वंडर विक का मानना है कि साइकिल ट्रैक के निर्माण भर से ही काम नहीं चलेगा। इन पर लोग चले, इसको लेकर जागरूकता फैलाना भी बहुत जरूरी होगा। जब तक लोग साइकिल से चलना पसंद नहीं करेंगे, ऐसे ट्रैक बनाए जाना सार्थक नहीं हो सकेगा।
सरकार को इस दिशा में भी कोशिश करनी चाहिए। हालैंड से आए साइकिल ट्रैक के विशेषज्ञ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ये ही सलाह देने जा रहे हैं, ताकि साइकिल ट्रैक अधिक से अधिक उपयोग हो।
विशेषज्ञ ने ट्रैक पर ये दी सलाह
राजधानी के पहले साइकिल ट्रैक का परीक्षण सोमवार को किया गया। विक्रमादित्य मार्ग के साइकिल ट्रैक का निरीक्षण करने के लिए मंगलवार को हालैंड के विशेषज्ञ विन वंडर विक ने एलडीए के मुख्य अभियंता ओपी मिश्र, पीडब्ल्यू के मुख्य अभियंता वीके सिंह, एक्सईएन रोहित खन्ना और एके सिंह के साथ दोपहर में इस साइकिल ट्रैक पर साइकिल चलाकर खुद अनुभव किया।
ट्रैक की गुणवत्ता से खुश, पर सुधार संभव
हालैंड के विशेष ने बताया कि साइकिल ट्रैक की गुणवत्ता के लिहाज से तो कोई कमी नहीं है। मगर जंक्शन पाइंट पर कुछ बदलाव किया जाना जरूरी होगा। जंक्शन पाइंट एक साइकिल सवार के लिए सबसे अधिक जरूरी होता है। वहां पर कुछ तकनीकी खामी है, जिसको दूर किया जा सकता है।
लखनऊ के लोग इस तरह के ट्रैक के आदी नहीं है। इसलिए साइकिल ट्रैक का लगातार परीक्षण कर खामियां ढूंढनी होंगी, ताकि ये दिन-ब-दिन बेहतर होते जाएं।
इस तरह दिखेगा साइकिल ट्रैक
साइकिल ट्रैक ढाई मीटर चौड़ा है। विक्रमादित्य मार्ग पर दोनों ओर साइकिल ट्रैक बनाया गया है। जबकि बाकी मार्गों पर सिंगल ट्रैक और दोनों ओर ब्रिक्स से जोड़ा जाएगा। साइकिल ट्रैक के नीचे सब बेस 10 सेमी. मोटा होगा। इसके बाद 7.5 सेमी का बेस होगा। इसके साथ 5 सेमी मोटी बीएम डाली जाएगी। वहीं, 2.5 सेमी मोटी बीसी डाली जाएगी।
मुख्य मार्ग और साइकिल ट्रैक के बीच एक रेलिंग होगी जो मुख्य मार्ग से 15 सेमी ऊंची होगी। इसके लिए पत्थर लगाए जाएंगे। जबकि जो वाहनों की लेन होगी, उसमें हर 50 से 60 मीटर की दूरी पर सफेद कलर से साइकिल का सिंबल बनाया जाएगा।
जहां पर साइकिल ट्रैक मुख्य मार्ग को क्रॉस करेगा, वहां पर चार मीटर की चौड़ाई में हरे रंग से साइकिल का सिंबल बनाया जाएगा। वहीं, साइकिल ट्रैक पर भी साइकिल का सिंबल होगा।