डॉ. सृष्टि श्रीवास्तव
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पापा ने भर्ती होने से इन्कार किया, बेटी ने घर को अस्पताल बना दिया
- डॉ. सृष्टि श्रीवास्तव, डेंटिस्ट
पापा डॉ. सतीश कुमार श्रीवास्तव सोनभद्र में रहते हैं। मां-पापा दोनों की तबीयत बिगड़ी। मम्मी को हल्का असर था, पर पापा की तबीयत ज्यादा खराब थी। उन दोनों को लखनऊ बुला लिया। पापा का सिटी स्कोर 16 था, यानी 70 फीसदी के आसपास फेफड़े प्रभावित हो चुके थे। केजीएमयू लेकर जाने की व्यवस्था की। ले भी गए, कैंपस में पहुंचे, वहां भीड़ और चारों तरफ से मिल रही नकारात्मक खबरें सुनकर पापा ने कहा, मुझे यहां से ले चलो। फैसला मुश्किल था, डर भी था, क्योंकि अपनों को खोने का गम हर तरफ से सुनाई दिखाई दे रहा था। मन कड़ा किया, पापा को घर लाई और अपने डॉक्टर मित्रों व कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों से टेली काउंसिलिंग के जरिए पापा का ट्रीटमेंट घर पर शुरू किया। ऑक्सीजन, इंजेक्शन, कन्संट्रेटर, दवा सब घर पर। ड्रिप लगाने से लेकर इंजेक्शन लाने तक का काम खुद किया। कुछ दोस्त लगातार फोन पर उपलब्ध थे, वे बताते रहे, मैं इलाज कराती रही। डर लग रहा था, पर पापा की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी पोस्ट कोविड ट्रीटमेंट भी घर पर किया और अंतत: पापा ठीक हुए और घर चले गए।
हालात कैसे भी हों, घबराओ मत
पापा ने ही सिखाया है कि हालात कैसे भी हों, मुश्किल आने पर कभी घबराओ मत। बस आपकी तबीयत खराब होने के वक्त इसी सीख ने हौसला दिया।