लखनऊ। केजीएमयू के डॉक्टरों ने फेफड़े की दुर्लभ बीमारी पल्मोनरी एल्वियोलर प्रोटीनोसिस (पीएपी) से पीड़ित की जान बचाने में कामयाबी पाई है। बीमारी के कारण मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर था।
डॉक्टरों ने उसके फेफड़ों से प्रोटीन व चिकनाई युक्त गाढ़े पदार्थ को अलग-अलग दिनों में स्लाइन व अन्य दवाओं से साफ किया। इस प्रक्रिया को होल लंग लावेज (डब्ल्यूएलएल) कहते हैं। केजीएमयू के इतिहास में पहली बार इस प्रक्रिया से किसी की जान बचाई गई है। केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में बताया कि यह बीमारी दस लाख लोगों में से करीब सात को होती है।
डॉ. सुरेश ने बताया कि गोरखपुर के बस्ती निवासी 40 वर्षीय अनिरुद्ध को सांस फूलने, खांसी और शरीर में ऑक्सीजन की कमी की शिकायत पर रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया। उन्हें हाई फ्लो नेजल से ऑक्सीजन दी गई। खून की जांच व सीने का एक्सरे कराया गया। फेफड़ों की जांच के लिए सीटी स्कैन हुआ।
डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि अनिरुद्ध के दोनों फेफड़े बीमार थे। उसमें पल्मोनरी एल्वियोलर प्रोटीनोसिस के संकेत मिले। जांच में दुर्लभ बीमारी पीएपी की पुष्टि हुई। इस पर होल लंग लावेज करने का फैसला लिया गया।
डॉ. सुरेश ने बताया कि प्रोटीन और चिकनाई युक्त गाढ़ा पदार्थ मरीज के फेफड़ों की छोटी-छोटी वायु कोशिकाओं में जमा हो गया था। ऐसे में 13 जून को दाहिने और सात जुलाई को बाएं फेफड़े की लावेज प्रक्रिया से सफाई की गई। मरीज ने कई वर्षों तक सीमेंट का काम किया, जो फेफड़ों की बीमारियों का बड़ा कारण है।
जानिए, क्या है पीएपी बीमारी
डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि पल्मोनरी एल्वियोलर प्रोटीनोसिस (पीएपी) बीमारी में फेफड़ों के वायुकोषों में सर्फेक्टेंट नामक पदार्थ जमा हो जाता है। यह वायुकोषों को ठीक से काम करने से रोकता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
इलाज करने वाली टीम के सदस्य
डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. राजीव गर्ग, डॉ. एसके वर्मा, एनस्थीसिया विभाग की डॉ. शेफाली गौतम, डॉ. विनीता सिंह, डॉ. कृतिका यादव व डॉ. राहुल।