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मंत्रीजी ने सरकारी किताब को ही बताया झूठी

Mon, 24 Feb 2014 11:00 PM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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उच्च सदन में सोमवार को अजीबो गरीब नजारा देखने को मिला।
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नेता विरोधी दल नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने जैसे ही कहा कि सत्ता पक्ष के लोग जिन स्मारकों की बुराई करते नहीं थकते, सरकारी किताब ने उन्हें ही लखनऊ का नया दर्शनीय स्थल माना है।
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यह सुनकर सदन के नेता सदन अहमद हसन भड़क उठे। किताब को फर्जी बताते हुए कहा कि यह किताब उनकी  सरकार ने नहीं छपवाई है।

जिस आईएएस का नाम प्रकाशक-मुद्रक के रूप में दिया गया है वह उनके जमाने में भी था और हमारे जमाने में भी है।

नेता सदन ने यहां तक कह डाला कि अगर इन्होंने जाल-फरेब न किया होता तो हमारी सरकार न आई होती।

उच्च सदन में इस मुद्दे को लेकर काफी देर तक नोकझोंक चलती रही।

नेता विरोधी दल को सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर बोलना था।

अभिभाषण को सरकारी पत्रिका करार देने के बाद वे सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से प्रकाशित होने वाली किताब ‘उत्तर प्रदेश-2013’ पर चर्चा करने लगे।

जो सरकार स्मारकों की बुराई करते नहीं थकती। हरदम हाय पत्थर-हाय पत्थर करते रहते हैं।

कभी कहते हैं कि स्मारकों में अस्पताल खुलेगा तो कभी कहते हैं कि स्कूल खुलेगा।

कभी कहते हैं कि शादी करवाएंगे। उसकी ही सरकार में प्रकाशित किताब ने इसे लखनऊ के नए दर्शनीय स्थल माना है।

नसीमुद्दीन ने कहा कि किताब के पेज नंबर 57 पर इसकी विस्तृत चर्चा की गई है।

डॉ. भीमराव सामाजिक परिवर्तन स्थल, डॉ. भीमराव अंबेडकर विहार, समता मूलक परिवर्तन चौक, सामाजिक परिवर्तन गैलरी संग्रहालय, कांशीराम स्मारक स्थल व अवध विहार शांति उपवन को 21वीं सदी के प्रथम दशक का नया प्रतिमान माना गया है।
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इसकी हरियाली, बनावट, इसमें लगी महापुरुषों की प्रतिमाओं और इसकी इंजीनियरिंग की खूब तारीफ की गई है।

उन्होंने कहा कि जब सरकारी किताब में इतनी बड़ाई, तो आखिर बुराई किस बात की।

नेता विरोधी दल किताब का हवाला देकर तारीफों के पुल बांध ही रहे थे कि बीच में नेता सदन खड़े हो गए।

उन्होंने कहा कि जिस सरकारी किताब का हवाला दिया जा रहा है, वह इन्होंने अपने जमाने में छपवा ली होगी।

उनकी सरकार ने ऐसी कोई किताब नहीं छपवाई है। इन्होंने बहुत जाल-फरेब किया है।

इसी तरह किताब भी छपवाई होगी। इसकी जांच करा ली जाएगी कि किताब कैसे छपी और किसने छपवाई है।

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