अखिलेश यादव ने शुक्रवार को बयान में कहा कि राज्य सरकार ने अभी तक गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) घोषित नहीं किया है जबकि 2019-20 का पेराई सत्र चालू हो चुका है।
खाद, बीज, पानी, बिजली, कीटनाशक, डीजल सभी की कीमतें बहुत बढ़ गई है। पिछली फसलों में हुए नुकसान के चलते किसान कर्ज में डूबा हुआ है। परेशानी और अवसाद में सैकड़ों किसान आत्महत्या तक कर चुके हैं।
किसान की व्यथा सुनने वाला कोई नहीं। धान के क्रय केंद्र अभी तक नहीं खुले हैं। ऐसे में दलाल और आढ़तिए किसानों को औने-पौने दाम में अपनी
फसल बेचने को मजबूर कर रहे हैं। यही हाल आलू किसानों का है। भाजपा सरकार किसानों की बर्बादी की जिम्मेदारी से नहीं बच सकती है।