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'मोदी प्लान' से ही भाजपा को टक्कर देंगे 'टीपू'

Thu, 22 May 2014 10:17 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
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आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को खतरा मान रही सपा अब उसी रणनीति पर काम करेगी, जिसने भाजपा को केंद्र की सत्ता तक पहुंचाया। जिसके लिए पार्टी अपने विकास एजेंडे को नया कलेवर देने की तैयारी में है।
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विकास एजेंडे में मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली और सीधे जनता से जुड़ी योजनाओं को शामिल कर उनको अमली जामा पहनाया जाएगा। खास बात यह है अब सरकार लागू की जाने वाली योजनाओं का व्यापक प्रचार भी कराएगी ताकि उसका राजनीतिक फायदा भी मिल सके।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान संसदीय दल के नेता नरेंद्र मोदी ने गुजरात सरकार और एनडीए के शासनकाल में किए गए कामों का बेहतर ढंग से प्रचार प्रसार किया था, जिसका लाभ उन्हें प्रदेश में उम्मीद से भी ज्यादा हुआ और पार्टी अविश्वसनीय प्रदर्शन करते हुए 71 सीटें लाने में कामयाब रही।
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अखिलेश सरकार इस वित्तीय वर्ष के लिए तैयार कराए गए भारी-भरकम विकास एजेंडे में शामिल कुछ अनुपयोगी योजनाओं को हटाने की भी तैयारी है।
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विधानसभा चुनाव की तैयारी

लोकसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद राज्य सरकार अब विकास के एजेंडे पर तेजी से अमल करने की तैयारी में जुटी है। अगले ढाई साल में सपा के चुनाव घोषणा पत्र में किए गए वादों को अमल में लाने की रणनीति तैयार की जा रही है।

ब्लॉक से लेकर शासन स्तर तक योजनाओं को अमली जामा पहनाने के लिए अफसरों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
2014-15 के लिए तय किए गए भारी-भरकम विकास एजेंडे में विभिन्न विभागों के 243 बिंदु शामिल किए गए हैं।

सरकार महसूस कर रही है कि ऐसी योजनाएं चिह्नित करके प्रभावी अमल शुरू कराया जाए जिसका सीधा जनता को फायदा हो विकास एजेंडे का मकसद सरकार के बारे में लोगों के बीच सकारात्मक संदेश भेजा जाना है।

मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने प्रमुख सचिव नियोजन संजीव मित्तल को प्रमुख विभागों के आला अधिकारियों के साथ बैठक करके इसकी समीक्षा करने और नए सिरे से एजेंडे के बिंदुओं को तय करने को कहा है।

जनता से सीधे जुड़ी होंगी योजनाएं

सूत्रों का कहना है कि विकास एजेंडे में शामिल बहुत-सी ऐसी योजनाओं को हटाया जा सकता है जिनका आम जनता से सीधा संबंध नहीं है।

44 विभागों में चल रही ऐसी योजनाएं चिह्नित की गई हैं जिन्हें बहुत उपयोगी नहीं माना जा रहा है।

आगामी बजट सत्र में इन योजनाओं के भविष्य का फैसला होगा। इसके बाद एजेंडे को अंतिम रूप देकर अमल में लाने की कवायद शुरू की जाएगी।
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इन क्षेत्रों पर होगा विशेष जोर

कृषि, उद्योग, अवस्थापना एवं लोक निर्माण, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, ग्राम विकास, सिंचाई, नगरीय सुविधाएं, श्रम तथा पारदर्शी एवं प्रभावी प्रशासन की सीमित योजनाओं को एजेंडे में शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के निर्माण, औद्योगिक सेवा गारंटी अधिनियम, पीपीपी नीति के  पुनरीक्षण, उद्योगों के लिए भूमि आवंटन नीति एवं इससे जुड़ी प्रक्रिया का सरलीकरण, दिल्ली-मुम्बई इडस्ट्रियल कॉरिडोर तथा अमृतसर-दिल्ली-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर भी जोर रहेगा।

साथ ही उन्नाव में ट्रांस गंगा औद्योगिक क्षेत्र के  विकास, औरैया में प्लास्टिक सिटी, मेगा लेदर क्लस्टर योजना तथा ग्रेटर नोएडा में नाइट सफारी को विकास एजेंडे में रखा जा रहा है।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कुशीनगर व आगरा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का काम तेज कराने पर भी जोर रहेगा। सड़कों और पुलों के साथ-साथ  2016-17 में शहरों को 24 तथा गांवों को 18 घंटे बिजली देने के लिए बिजलीघरों, नए उपकेंद्रों के निर्माण को भी एजेंडे में प्रमुखता दी जाएगी।
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