समाजवादी पार्टी 2017 के चुनाव में जाने से पहले अपने ऊपर लगा मुस्लिम परस्ती का ठप्पा हटाना चाहती है। कभी मौलाना मुलायम कहे जाने पर फक्र महसूस करने वाली पार्टी बदले सियासी परिदृश्य में अपनी पुरानी पहचान से छुटकारा पाना चाहती है।
केंद्र में मोदी सरकार के प्रति नरमी और गंगा व गाय पर पार्टी का नया रुख यही तो संकेत देता है। सपा सुप्रीमो मुलायम एक तरफ आजम खां के गौशाला की मदद कर रहे हैं और गाय का पूजन कर उसका कटान रोकने वालों की पीठ थपथपा रहे हैं। तो दूसरी तरफ वह गंगा सफाई का संकल्प भी ले रहे हैं। यानी हर लहजे से यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि सपा हर वर्ग का पूरा ख्याल रखती है।
वर्ष 1990 के बाद से प्रदेश में सपा की छवि मुस्लिम समर्थक दल के रूप में रही है। अक्तूबर 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाने के बाद एक दौर ऐसा भी आया जब सपा अध्यक्ष को मौलाना मुलायम सिंह तक कहा गया। रामजन्म भूमि आंदोलन के वक्त उन पर लगा मुस्लिम समर्थन का ठप्पा कब मुस्लिम परस्ती में बदल गया, यह पता भी नहीं चला।
मुस्लिम-यादव का जातीय समीकरण उन्हें जबर्दस्त सियासी लाभ भी देने लगा। लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में सपा का यह समीकरण फेल होता नजर आया। इसके बाद देश और प्रदेश के सियासी परिदृश्य में भी एक अलग तरह का सियासी बदलाव दिखने लगा है।
सांप्रदायिक मुद्दों पर कभी खुलकर नहीं बोलते अखिलेश
ऐसे में अब सपा की कोशिश उदार छवि के साथ ही मैदान में उतरने की है। सीएम अखिलेश यादव तो सांप्रदायिक मुद्दों पर कभी चुनौतीपूर्ण अंदाज में नहीं बोलते और सीधे वार से बचते हैं, लेकिन अब मुलायम सिंह के तेवर भी कुछ बदले-बदले नजर आ रहे हैं।
इसके पीछे सपा की योजना सर्वग्राह्य पार्टी बनने और बेस वोट से इतर हिंदू मतदाताओं में सेंधमारी कर 2017 की सत्ता में फिर वापसी करने की है।
वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त तीर्थ यात्रा
मुस्लिम परस्त या कथित हिंदू विरोधी छवि को तोड़ने के लिए सपा सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों को सरकारी खर्चे पर प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा कराने की योजना बनाई है। अब तक हरिद्वार-ऋषिकेश और अजमेर-पुष्कर की यात्राएं कराई जा चुकी हैं। अब तिरुपति-रामेश्वरम की यात्रा 4 दिसंबर से प्रारंभ होगी।
हज यात्रियों की तरह कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने वाले प्रदेश के नागरिकों को अनुदान दिया जा रहा है, जो प्रति नागरिक 50 हजार रुपये है। इसका उद्देश्य बहुसंख्यकों में सकारात्मक संदेश देना है।
गौभक्त बने मुलायम व आजम
मुलायम सिंह और आजम खां इन दिनों गौभक्त बन गए हैं। आजम खां गौहत्या ही नहीं, पशुवधशालाओं को बंद करने व मीट निर्यात पर रोक की मांग करते रहे हैं। उनकी सांसद पत्नी तजीन फातिमा ने अपनी सांसद निधि से मथुरा की गौशाला को 25 लाख रुपये दिए हैं। वहीं, सपा मुखिया मुलायम सिंह बृहस्पतिवार को लखनऊ में गोपाष्टमी के पूजन में शामिल हुए। उन्होंने गायों से लगाव रखने और उनका वध रोकने में मदद करने के लिए अपने छोटे बेटे प्रतीक यादव की सराहना की।
सीएम गौपालक, गौवध पर अब रासुका
मुख्यमंत्री अखिलेश प्राय: सार्वजनिक तौर पर कहते रहते हैं कि वह गाय पालते हैं। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद गौवध पर सजा को सख्त कर दिया गया है। कैबिनेट में प्रस्ताव पारित करके गुंडा और गैगेस्टर एक्ट में संशोधन किया गया है। अब गौकशी के आरोपी पर गुंडा व गैगेस्टर एक्ट में कार्रवाई होगी। पहले गौहत्या जमानती अपराध था। मुख्यमंत्री ने गौहत्या करने वालों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निरुद्ध करने के निर्देश दिए हैं।
लोकसभा चुनाव का सबक है सॉफ्ट लाइन
सपा ने लोकसभा चुनाव के नतीजों की आधिकारिक तौर पर कोई समीक्षा नहीं की है। लेकिन, अनौपचारिक तौर पर इसके निष्कर्ष निकाल लिए गए हैं। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में सपा की मुस्लिम परस्त छवि के चलते भाजपा को हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण में मदद मिली। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा इस गलती को दोहराना नहीं चाहती है। वह कोई ऐसा संदेश नहीं देना चाहती जिससे बहुसंख्यकों की नाराजगी बढ़े। इसके चलते ही अब वह सॉफ्ट लाइन अपना रही है। पर सपा मुस्लिमों को भी नाराज न कर उनके साथ बेस वोट की तरह व्यवहार जारी रखेगी।