उन्होंने कहा कि अभी भी उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर हजारों की संख्या में कामगारों को रोका जा रहा है। जो सैकड़ों किलोमीटर पैजल चलकर आ रहे हैं उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। वो बी दो-तीन दिन से भूखे प्यासे हैं।
अखिलेश ने कहा कि भाजपा सच्चाई का सामना करने से डरती है। सैंकड़ों कोस चलकर आए लाखों की संख्या में कामगारों का भविष्य शासन की अदूरदर्शिता के कारण अंधेरे में गुम हो गया है। इस सच्चाई को स्वीकार करने में भाजपा अपनी पराजय समझती है।
उन्होंने कहा कि पीड़ितों, गरीबों, कामगारों-श्रमिकों की हाय भाजपा को भस्म करने की ताकत रखती है। नोटबंदी और जीएसटी की अचानक घोषणाओं की तरह प्रधानमंत्री जी ने लॉकडाउन की भी अचानक घोषणा कर देश में विस्थापन और पलायन की जो स्थिति पैदा कर दी है, उससे देश अव्यवस्था और असुरक्षा के चक्र में बुरी तरह फंस गया है।
कितने ही श्रमिकों की जानें चली गई हैं। भूख-प्यास से दम तोड़ने की भी खबरें आ रहीं हैं। भाजपा अमीरों को राहत देने में लगी है। गरीब सड़क पर रेल पटरियों पर जान गंवा रहा है। भाजपा की वोट बैंक की राजनीति का यह खेल लोकतंत्र को कलंकित करने वाला है।