सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने कार्यकर्ताओं से कांग्रेस का विरोध करने की अपील करके हलचल मचा दी है। उनके रुख से कांग्रेस प्रत्याशियों के खिलाफ कई सपाई निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं।
मुलायम के नजदीकी कई विधायक और नेता पहले ही निर्दलीय या लोकदल से चुनाव लड़ रहे हैं। मुलायम के बयान का असर आखिरी चार चरणों में देखने को मिल सकता है।
मुलायम, सपा-कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने नाखुशी जताते हुए कार्यकर्ताओं से इसका विरोध करने के लिए कहा है। उन्होंने पार्टी नेताओं से कहा है कि जिन सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है, वहां वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल करें।
मुलायम ने उनके चुनाव प्रचार में आने का भरोसा भी दिया है। उनके ताजा रुख से सपा में हलचल मची हुई है। विधायक आशीष यादव (एटा), विधायक रामवीर सिंह (जसराना) और रामपाल यादव (बिसवां) समेत कई सपा नेता पहले तीन चरणों में राष्ट्रीय लोकदल, लोकदल के सिंबल पर या निर्दलीय नामांकन कर चुके हैं।
ये है सपा की स्थिति
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इटावा के विधायक रघुराज सिंह शाक्य समेत कई नेता मुलायम के अपमान के विरोध में इस्तीफा दे चुके हैं। चौथे चरण का नामांकन चल रहा है। चौथे, पांचवें, छठे और सातवें चरण में कांग्रेस के हिस्से में लगभग 60 सीटें आई हैं।
इनमें से पूर्वांचल और अवध की अधिकतर सीटों पर टिकट के दावेदारों में से कुछ बागी हो सकते हैं। मुलायम और मुखर हुए तो बागियों की तादाद बढ़ सकती है।
अब भी पश्चिमी यूपी में फीरोजाबाद से लेकर पूर्वांचल में बलिया तक मुलायम के नजदीकी लोग बागी तेवर अख्तियार किए हैं। कई नेता दूसरे दलों में जा चुके हैं।
डैमेज कंट्रोल की कोशिशें शुरू
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मुलायम का तेवर देखते हुए उन्हें मनाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक सीएम अखिलेश के निर्देश पर कुछ लोगों ने मुलायम सिंह को यह बताने की कोशिश की है कि प्रदेश में सपा ही सरकार बना रही है। उन्हें एक सर्वे का हवाला देकर बताया गया कि सपा को 187 से 197 के बीच सीटें मिलेंगी।
हालांकि मुलायम की तरफ से अभी कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है। टिकट से वंचित लोगों ने उनसे मुलाकात भी है। मुलायम के लखनऊ आने पर अखिलेश भी उनसे मिलने जा सकते हैं या दिल्ली में उनसे टेलीफोन पर बात कर सकते हैं।
मुलायम के इशारे पर शिवपाल के तेवर भी बागी
यह इत्तेफाक नहीं है कि मुलायम दिल्ली में पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं से कांग्रेस के हिस्से में आई सीटों पर निर्दलीय चुनाव लड़ने को कहते हैं तो अगले ही दिन इटावा में शिवपाल यादव 11 मार्च के बाद नई पार्टी बनाने की घोषणा करते हैं।
माना जा रहा है कि उनके तेवरों के पीछे मुलायम का इशारा है। शिवपाल ने चार दिन पहले ही चुनाव को अपनों के खिलाफ ‘धर्मयुद्ध’ कहा था।