भाजपा ने कहा है कि सपा के कार्यकर्ता संवैधानिक मर्यादा को भूलकर अब राज्यपाल का भी विरोध करने पर उतर आए हैं।
पार्टी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने गोरखपुर में राज्यपाल के विरोध को सत्तारूढ़ दल की बौखालहट का नतीजा बताया।
उन्होंने कहा, राज्यपाल अपने पद और गरिमा के अनुरूप संवैधानिक मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर कानून व्यवस्था, महिलाओं पर होने वाले अत्याचार सहित जनहित के मुद्दों पर राज्य सरकार को सुझाव देते रहते हैं लेकिन सपाइयों को राज्यपाल द्वारा ये मुद्दे उठाना रास नहीं आ रहा।
राज्यपाल का पद संवैधानिक होता है। उसे किसी दल या व्यक्ति से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
प्रवक्ता ने कहा, मुख्यमंत्री और सपा का प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते अखिलेश यादव की दोहरी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने कार्यकर्ताओं को अमर्यादित आचरण करने से रोकें।