सरकारी महकमे करोड़ों-अरबों का बजट वित्त वर्ष के अंतिम महीने में खर्च करने की आदत नहीं छोड़ पा रहे हैं। खुलासा हुआ है कि वर्ष 2013-14 में विभिन्न योजनाओं के लिए आवंटित बजट का आधे से ज्यादा हिस्सा 11 महीने तक दबाए रखा गया। 50.11 फीसदी बजट अकेले मार्च में खर्च हुआ। इससे सरकार की छवि पर असर पड़ रहा है।
सीएजी ने 2013-14 में राज्य सरकार के बजट खर्च का आकलन किया तो पता चला कि समस्त राजस्व व्यय का 23.37 प्रतिशत और योजनाओं से जुड़े बजट (पूंजीगत) का 50.11 फीसदी हिस्सा मार्च में खर्च किया गया।
इसमें सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों व अन्य उपक्रमों में निवेश व राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं व सहकारी संस्थाओं के पुनर्गठन के लिए अंशपूजी से जुड़े दो हजार करोड़ रुपये का पूरा बजट मार्च में खर्च किया गया। 50 फीसदी से ज्यादा बजट खर्च करने वाले विभिन्न विभागों की कई योजनाएं हैं।
सरकार ने बनाए थे अजीबोगरीब बहाने
वर्ष 2012-13 में जब बजट का काफी हिस्सा सरकार समय से खर्च नहीं कर पाई तो उसने विपक्षी आलोचना का यह कहकर बचाव किया था कि उसे बजट खर्च करने के लिए पूरा समय नहीं मिल पाया। सरकार उसी साल मार्च में सत्ता में आई थी। पर, 2013-14 में बजट का बड़ा हिस्सा साल के 11 महीने तक दबाए रखने पर सवाल उठना लाजिमी है।
प्रमुख मदों में मार्च में खर्च रकम
मद--कुल बजट (करोड़ में )--खर्च (प्रतिशत में)
सामान्य सेवाएं--2000.00--100
सहकारिता--13.06--74.12
शहरी विकास--813.00--67.95
सामाजिक सुरक्षा--1080.35--58.98
अन्य सामाजिक सेवाएं--316.84--57.90
अन्य प्रशासनिक सेवाएं--188.05--53.83
नागर विमानन--284.00--51.65
बिजली परियोजनाएं--6950.77--44.10
पुलिस--659.30--41.75
शिक्षा, खेलकूद व कला--1241.15--30.62
29.30 फीसदी अनुपूरक बजट भी नहीं खर्च कर पाए
सरकार अनुपूरक बजट तब लाती है जब किसी योजना के लिए मूल बजट में प्रस्तावित रकम अपर्याप्त होती है या कम पड़ने का अनुमान होता है। पर, हैरानी की बात ये है कि 2013-14 में 10,732 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट का 29.37 फीसदी हिस्सा बिना खर्च के पड़ा रह गया। 3152.06 करोड़ रुपये खर्च नहीं किए जा सके।
1,11,348.81 करोड़ का हिसाब-किताब नहीं
सरकार विभिन्न कार्यों के लिए जो सहायता या अनुदान देती है उसका उपभोग प्रमाणपत्र सत्यापन कराना सरकार की जिम्मेदारी है। इसके बाद ये प्रमाणपत्र सीएजी को भेजे जाने चाहिए ताकि वह यह देख सकें कि अनुदानों का मकसद सफल रहा या नहीं।
सीएजी की 2013-14 रिपोर्ट के अनुसार 1,11,348.81 करोड़ रुपये का उपभोग प्रमाणपत्र सरकार ने उसे नहीं दिया। इसके लिए वह लगातार लिखापढ़ी कर रहे हैं।
सीएजी को इस रकम का चाहिए हिसाब
वित्त वर्ष--रकम (करोड़ में)
2011-12 तक--80,438.16
20102-13--12,219.03
2013-14--18,691.62