राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने बसपा को वॉकओवर देने की तैयारी की तो सपा एकाएक सक्रिय हो र्गई। बसपा को भाजपा के पाले में साबित करने के लिए आनन-फानन में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आखिरी वक्त में प्रकाश बजाज का नामांकन पत्र दाखिल कराया। उसकी रणनीति बसपा को भाजपा के पाले में खड़ा करने की थी। बसपा के आधा दर्जन विधायकों की बगावत से उसकी रणनीति कुछ हद तक कारगर भी रही। अब प्रदेश में जल्द ही एक और सियासी उठापटक की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
संख्या बल को देखते हुए राज्यसभा चुनाव में सपा ने सिर्फ रामगोपाल यादव को उम्मीदवार बनाया था। ऐसी संभावना थी कि भाजपा 9 प्रत्याशी उतारेगी। नामांकन की आखिरी तिथि 27 अक्तूबर थी। भाजपा ने 26 अक्तूबर की रात को 8 उम्मीदवारों का ऐलान किया। नौवें प्रत्याशी पर सस्पेंस कायम रखा। समाजवादी पार्टी के हल्कों में चर्चा प्रारंभ हो गई थी कि भाजपा नौवां प्रत्याशी नहीं उतारेगी। वह बसपा प्रत्याशी को वॉकओवर देकर राज्यसभा पहुंचाएगी।
भाजपा-बसपा की रणनीति को नाकाम करने केलिए 27 अक्तूबर को आनन-फानन में वाराणसी के अधिवक्ता प्रकाश बजाज का नामांकन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कराया गया। रणनीति यह थी कि राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की स्थिति बने। सपा नेताओं का कहना था कि बसपा तभी चुनाव जीत सकती हैं जब भाजपा उसकी मदद करे। यदि चुनाव नहीं हुए तो संदेश जाएगा कि भाजपा ने बसपा को राज्यसभा की एक सीट का तोहफा दे दिया है। इसी रणनीति के तहत 2.50 बजे सपा विधायक इरफान सोलंकी और राजकुमार यादव नाटकीय अंदाज में प्रकाश बजाज को लेकर सेंट्रल हॉल पहुंचे।