आम चुनाव में करारी हार के बाद अखिलेश ने जिला स्तर तक की समितियां और प्रकोष्ठ भंग कर दिए थे लेकिन इसके साथ ही उनके सामने एक और समस्या आ गई।
समाजवादी पार्टी की प्रदेश से जिला स्तर तक की कमेटियां और सभी प्रकोष्ठ भंग हो जाने के बाद संगठन में समायोजन के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है।
जिला इकाइयों पर वर्चस्व को लेकर सबसे ज्यादा होड़ है। खेमों में बंटे सपाई अपना जिला अध्यक्ष बनवाने के साथ ही प्रदेश इकाई में नुमाइंदगी चाहते हैं।
ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष सभी गुटों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती रहेगी। लोकसभा चुनाव में हार के बाद सपा की प्रदेश कार्यकारिणी, सभी फ्रंटल संगठन, जिला इकाई और प्रकोष्ठ भंग किए जा चुके हैं।
जमीनी यथार्थ से वाकिफ अखिलेश, मुलायम
कई स्तरों की समीक्षा बैठकों के बाद सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के पास हर जिले का फीडबैक है।
उन्हें जानकारी मिल चुकी है कि चुनाव में किन नेताओं की भूमिका ठीक नहीं रही। किसने भितरघात किया और कौन सक्रिय नहीं रहा।
हालांकि जिले से प्रदेश तक की टीम गठित करने में विभिन्न स्तरों से आए फीडबैक की भूमिका रहेगी लेकिन पार्टी नेताओं ने पदों के लिए जोड़तोड़ शुरू कर दी है।
सबसे ज्यादा मारामारी जिलाध्यक्ष पदों पर कब्जे को लेकर है।
सभी लगे हैं जुगत भिड़ाने में
लोकसभा प्रत्याशी, विधायक, मंत्री, पूर्व मंत्री, प्रदेश संगठन के पूर्व पदाधिकारी, पूर्व जिलाध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेता जिला अध्यक्ष को लेकर लामबंदी में जुट गए हैं।
वे अपने जिलों में लॉबिंग कर रहे हैं। इसी के साथ 14 प्रकोष्ठों के अध्यक्ष पदों के लिए भी दावेदार सामने आने लगे हैं।
जिला स्तर की राजनीति में फिट न बैठने वाले नेताओं की नजर प्रदेश कार्यकारिणी पर है। कई नेता अनुभव, पार्टी से वफादारी और नेताजी से पुराने संबंधों का हवाला देकर प्रदेश कमेटी में पद चाहते हैं।
युवाओं की लंबी फौज
प्रदेश स्तरीय प्रकोष्ठों, खास तौर से युवा संगठनों के अध्यक्ष पद के लिए नौजवान नेताओं की लंबी फौज है। पहले इन पदों पर रह चुके नेता भी पुरानी स्थिति में वापसी चाहते हैं।
शुरुआती दौर में युवा फ्रंटल संगठनों की बहाली की कोशिशें की गईं, लेकिन सपा के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इसके लिए तैयार नहीं हुए।
सपा के प्रदेश प्रवक्ता और कारागार मंत्री राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि सपा के पास सर्वाधिक युवा कार्यकर्ता हैं। वर्ष 2012 में सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है।
पार्टी संगठन में जगह पाने के लिए युवा संगठनों में मारामारी नहीं है। क्षमता और योग्यता के आधार पर पार्टी नेतृत्व जिसका चयन करेगा, उसकी अगुवाई में नौजवान काम करेंगे।