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यूपी के मोर्चे पर कामयाब हुई प्रियंका, सोनिया ने भी दिया दखल

Mon, 23 Jan 2017 02:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रियंका वाड्रा व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी - फोटो : amar ujala
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यूपी में सपा और कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद परवान चढ़ सका। गठबंधन की बातचीत को अंजाम तक पहुंचाने के लिए जहां सोनिया ने सीधे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बातचीत की वहीं सीट बंटवारे को लेकर पैदा हुए गतिरोध को समाप्त करने के लिए प्रियंका वाड्रा ने भी पर्दे के पीछे सक्रिय भूमिका निभाई।
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शनिवार रात तक गतिरोध कायम था लेकिन रविवार सुबह से लेकर दोपहर तक कांग्रेस व सपा के  शीर्ष नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत के बाद आखिरकार 105 सीटों पर सहमति बन गई।

बताया जा रहा है कि कुछ पसंदीदा सीटों को छोड़ने के लिए सपा को राजी करने के लिए प्रियंका को अखिलेश के साथ बातचीत के मोर्चे पर लगाया गया। उन्होंने अखिलेश को राजी भी कर लिया। इसके बाद गठबंधन का औपचारिक एलान हुआ।
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खास बात यह कि कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर प्रियंका के दूत धीरज श्रीवास्तव के साथ पिछले तीन दिनों से लखनऊ में ही डटे थे। सपा और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बीच तार जोड़ने में पर्दे के पीछे उनकी भी भूमिका काफी अहम रही।

गठबंधन के अलावा नहीं था कोई विकल्प

- फोटो : amar ujala
मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए सपा और कांग्रेस दोनों के लिए गठबंधन करके चुनाव में उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं था लेकिन सीटों को लेकर पैदा हुए गतिरोध के चलते असमंजस की स्थिति बन गई थी।

शनिवार को एक तरह से बातचीत टूट ही गई थी क्योंकि सपा कांग्रेस को 99 सीट से ज्यादा देने को तैयार नहीं थी और कांग्रेस 120 पर अड़ी थी। मुख्य रूप से रायबरेली व अमेठी की सीटों को लेकर पेंच फंसा था। कांग्रेस इन दोनों जिलों की सीटों पर अपना दावा ठोंक रही थी जबकि सपा इनमें से कई सीटें अपने पास होने की बात कहते हुए देने को तैयार नहीं थी।

सूत्रों के अनुसार, सीटों को लेकर पेंच फंसने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को पूरे मामले की जानकारी दी। हालांकि, पीके और धीरज की अखिलेश से बातचीत बेनतीजा रहने के  बाद एक बार फिर प्रियंका को मोर्चे पर लगाया गया। इसी बीच सोनिया भी सक्रिय हो गईं।

सूत्रों की मानें तो सोनिया और प्रियंका से फोन पर दो-तीन दौर की बातचीत के बाद अखिलेश ने थोड़ा लचीला रुख अपनाते हुए अमेठी-रायबरेली की कुछ सीटों समेत 105 सीटें कांग्रेस को देने के लिए हामी भर दी। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर को गठबंधन के औपचारिक एलान के लिए लखनऊ जाने को कहा गया।

आखिरी वक्त तक सक्रिय रहे दूत
अखिलेश से बातचीत के लिए दिल्ली से भेजे गए प्रशांत किशोर और धीरज किसी भी सूरत में गठबंधन को परवान चढ़ाने की मुहिम में जुटे थे। शनिवार शाम दोनों की अखिलेश से लंबी बातचीत हुई लेकिन सीटबंटवारे पर बात नहीं बनी और गठबंधन खटाई में पड़ता दिखने लगा। लेकि न कांग्रेस ने हार नहीं मानी और गठबंधन बचाने के लिए आखिरी दांव चला जो कामयाब रहा। कांग्रेस की कोशिश थी कि सपा जिद छोड़कर थोड़ा पीछे हटे ताकि बात बन जाए और ऐसा ही हुआ। निर्णायक बातचीत में अखिलेश कांग्रेस के लिए छह और सीट छोड़ने पर राजी हो गए।

भाजपा की विघटनकारी नीतियों को देंगे चुनौती : राज बब्बर

सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा व प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम व राज बब्बर - फोटो : amar ujala
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने कहा कि आज देश और प्रदेश में जो माहौल है, उसे देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने जनता की इच्छाओं पर गौर करते हुए सपा से गठबंधन का फैसला किया है।

यह फैसला तमाम सामाजिक संस्थाओं, बुद्धिजीवियों व समान विचार वालों के अनुरोध पर प्रदेश की जनता की प्रगति के लिए किया गया है। यही वजह है कि  सपा व कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ने का ऐतिहासिक फैसला किया है।

एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में राज बब्बर ने कहा कि सपा व कांग्रेस की साझा राजनीतिक व वैचारिक ताकत भाजपा की ध्रुवीकरण, विभाजन व विघटन करने वाली नीतियों को चुनौती देगी।  इससे उप्र के सभी क्षेत्रों में अमन, शांति, आर्थिक उन्नति व समृद्धि का एक नया वातावरण बनेगा।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के रचनात्मक  कार्य और आगे बढ़ेंगे। दोनों पार्टियों का गठबंधन जाति व धर्म से ऊपर उठकर प्रदेश के हर नागरिक को सुरक्षा और सामाजिक गरिमा तथा युवाओं को सशक्तीकरण देगा।
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सरकार बनने पर हफ्ते भर में साझा एजेंडा

- फोटो : amar ujala
गठबंधन का श्रेय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को देते हुए राज बब्बर ने कहा कि सत्ता में आने के एक हफ्ते के भीतर शासन और कामकाज का साझा एजेंडा पेश किया जाएगा। यह एजेंडा शासन-प्रशासन को प्रभावकारी, पारदर्शी व जवाबदेह बनाने के साथ ही किसानों व खेतिहर मजदूरों को इंसाफ दिलाएगा।

प्रगति की ओर देखेंगे न कि बेहाली की ओर
यह पूछने पर कि ‘27 साल यूपी बेहाल’ के नारे का अब क्या होगा? राज बब्बर ने कहा, अब हम सूबे की प्रगति की ओर देखेंगे न कि बदहाली की ओर।

कुछ सवालों पर असहज दिखे
राज बब्बर पत्रकार वार्ता में थोड़े असहज दिखे। पत्रकारों ने उनसे कई प्रश्न पूछे लेकिन वह जवाब देने से बचते नजर आए। उनसे जब राहुल गांधी की खाट सभा में सपा पर लगाए गए आरोपों के बारे में पूछा गया तो वह बगैर जवाब दिए उठ गए।
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