भाजपा में शामिल होते हुए आरपीएन सिंह
कांग्रेस के कद्दावर नेताओं के छोड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब राजा पडरौना के नाम से मशहूर और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह के भाजपा में जाने से आसपास के क्षेत्र में सत्ताधारी दल को मजबूती मिलने की पूरी संभावना है। वह पड़रौना से मौजूदा विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं, जो हाल ही में भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए हैं। आरपीएन का गोरखपुर मंडल में पिछड़ी सैंथवार जाति में ठीक-ठाक प्रभाव माना जाता है।
आरपीएन सिंह ने भाजपा में शामिल होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के लिए बड़ी ही शाइस्तगी से अपना इस्तीफा भेजा। अपने त्यागपत्र में उन्होंने राष्ट्र, आम लोग और पार्टी की सेवा का अवसर देने के लिए धन्यवाद भी दिया। उनके पास अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की सदस्यता के साथ झारखंड के पार्टी प्रभारी की भी भूमिका थी। आरपीएन के इस कदम की कांग्रेस में किसी को भनक तक नहीं लगी। इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि सोमवार को एआईसीसी से जारी स्टार प्रचारकों की सूची में आरपीएन सिंह का नाम भी शामिल था।
तीन बार के विधायक आरपीएन सिंह ने 2009 में पडरौना से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता। उन्हें केंद्र की यूपीए की सरकार में राज्यमंत्री बनाया गया। हालांकि, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में वे जीत का सिलसिला जारी नहीं रख सके। 2009 का लोकसभा चुनाव आरपीएन ने तब बसपा प्रत्याशी के तौर पर लड़े स्वामी प्रसाद मौर्य को 21 हजार से ज्यादा मतों से हराकर जीता था। मौर्य वर्तमान में पडरौना से ही विधायक हैं। इसलिए माना जा रहा है कि भाजपा आरपीएन या उनके परिवार के किसी सदस्य को पडरौना से चुनावी मैदान में उतार सकती है।
कांग्रेस को बड़ा झटका
आरपीएन का कांग्रेस छोड़कर जाना पार्टी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। उनके पिता सीपीएन सिंह भी पडरौना से सांसद रहे थे। उन्हें 1980 की इंदिरा गांधी सरकार में केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी। इसलिए उनका घराना कांग्रेस का पुराना परिवार माना जाता है।
इन दिग्गजों ने छोड़ा पार्टी की साथ
आरपीएन से पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, मड़िहान के पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी, राठ के पूर्व विधायक गयादीन अनुरागी, चार बार के विधायक व सांसद रहे हरेंद्र मलिक और उनके बेटे व पूर्व विधायक पंकज मलिक के साथ ही चार मौजूदा विधायक भी कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं। इसके अलावा पूर्व सांसद राजाराम पाल, पूर्व विधायक विनोद चंद्र चतुर्वेदी, पूर्व सांसद अनु टंडन, अलीगढ़ से चार बार के विधायक और सांसद रहे ब्रजेंद्र सिंह भी कांग्रेस छोड़ चुके हैं।