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'हम भाषा संस्कृति की बात करें तो भगवाकरण, विदेशी कहें तो वाह-वाह'

Thu, 26 May 2016 12:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी - फोटो : amar ujala
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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि देश की भाषा और संस्कृति के बारे में कोई भारतीय बात करे तो उसे भगवा करार दिया जाता है लेकिन जब वही बात कोई विदेशी कहे तो भाषा का मोल बढ़ जाता है।
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केंद्र सरकार तकनीक के जरिये भाषा और संस्कृति की ताकत को दुनिया में पहुंचाने का प्रयास कर रही है। इससे युवा पीढ़ी अपना ज्ञान बढ़ा सकेगी और शोध में भी फायदा होगा।

वह मोदी सरकार के दो साल पूरा होने की पूर्व संध्या पर भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय में भारतवाणी पोर्टल और मोबाइल एप के लोकार्पण समारोह में बोल रही थीं।
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ईरानी ने कहा, भाषा को लेकर अक्सर वह सवालों के घेरे में रहती हैं। मीडिया में तूफान खड़ा कर दिया गया कि स्मृति ईरानी आईआईटी में संस्कृत पढ़ाना चाहती हैं। मुझे संसद में जवाब देना पड़ा। यहां अपनी भाषा पढ़ाने के लिए दंडित करने का भाव है।

जब भी किसी भाषा को लेकर चिंता और विवाद होता है तो उससे जुड़े भाषा विद को सहना पड़ता है। उसे लगता है, जैसे वह भाषा का प्रेमी न होकर कोई सांप्रदायिक प्राणी है। लेकिन जब कोई विदेशी वही बात करता है तो उसका मोल बढ़ जाता है।

'संस्कृत ज्ञान की दृष्टि से 100 साल से जीवित भाषा'

उन्होंने नासा के एक वैज्ञानिक के शोध का हवाला दिया। उनके मुताबिक उस वैज्ञानिक ने 1980 में एक शोध पत्र में कहा कि संस्कृत ज्ञान की दृष्टि से 100 साल से जीवित भाषा है।

मगर, यही बात कोई भारतीय कहता तो उसे भगवाधारी करार दिया जाता। इसी तरह एक अमेरिकी गणितज्ञ ने कांचीपुरम मठ की लाइब्रेरी में आकर अध्ययन किया और फिर लिखा कि विश्व की ज्यामिट्री की सबसे पुरानी किताब हिंदुस्तान में संस्कृत में है।

वह लेख छपता है और बड़ी प्रशंसा होती है। लेकिन यही लेख यदि आईआईटी की कोई शिक्षिका लिखती तो उसका क्या हश्र किया जाता?

स्मृति ने कहा, तकनीक की बात करें तो 40 करोड़ हिंदुस्तानी हिंदी में बोलते, लिखते और पढ़ते हैं लेकिन जब वेब पर भारतीय भाषा के कंटेंट की बात करें तो यह एक फीसदी भी नहीं मिलता। प्रधानमंत्री ने भाषा को तकनीक से जोड़ने का आह्वान किया है।

उनके मंत्रालय ने भारतवाणी पोर्टल और मोबाइल एप लॉन्च कर डिजिटल इंडिया में अहम पहल की है। भाषा को तकनीक से जोड़ने का बड़ा लाभ शोध के क्षेत्र में होगा। इस पहल से भारत की संस्कृति, इतिहास व विरासत राष्ट्र व विश्व के सामने प्रतिष्ठित होगी। संस्कृति व सभ्यता की ताकत सामने आएगी।

विश्व रैंकिंग के तरीके पर उठाया सवाल

स्मृति ने कहा, अक्सर कहा जाता है कि दुनिया के 100 या 200 संस्थानों में भारत का कोई नाम नहीं है लेकिन ऐसी रैंकिंग में वे संस्थान ही शामिल किए जाते हैं जो अंग्रेजी पढ़ाते हैं।

वाराणसी का संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय तो अंग्रेजी पढ़ाता ही नहीं। ऐसे में उस तरह के संस्थानों के साथ कितना अन्याय होगा? ऐसे संस्थान तो कभी इस प्रतिस्पर्धा में आ ही नहीं पाएंगे। हम जो रैंकिंग करा रहे हैं उसमें हमारी ताकत उभर कर सामने आ रही है।

भाषा को जोड़ने का काम करेगी प्रौद्योगिकी
उन्होंने कहा, शिक्षा क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती भाषा का माध्यम है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध में प्रमाणित हो चुका है कि मातृभाषा इस चुनौती को सबसे आसान बनाती है।

देश में 1535 मातृभाषाएं हैं लेकिन भाषा अनेक होने के बावजूद हमारा स्वर एक है। यह देश की ताकत है। प्रौद्योगिकी के सहारे हर भाषा तक लोगों की पहुंच हो सकेगी।
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केंद्रीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी नहीं

ईरानी ने कहा, केंद्रीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी नहीं है। कांग्रेस सरकार ने अपने अंतिम दो साल में जहां 40 हजार शिक्षकों की भर्ती की, मोदी सरकार ने दो साल में एक लाख शिक्षकों की भर्ती की है।

उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के रिक्त पदों के सवाल पर कहा,ये संस्थान स्वायत्त हैं। उन्हें अपने नियमों के हिसाब से भर्ती करनी होती है।

उन्होंने बताया कि केंद्र ने अंग्रेजी में लर्निंग को लेकर एक विशेष योजना बनाई है। शिक्षक- छात्र के बीच बेहतर समन्वय के लिए यह अहम काम होगा।

सियासी सवालों पर चुप रहीं
केंद्रीय मंत्री ने मीडिया से उच्च शिक्षा से जुड़े विषयों पर खुलकर बात की। मगर, जब यूपी का मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने और असम के बाद यूपी में भाजपा के प्रदर्शन से जुड़े सवाल पूछे गए तो वह हंस कर टाल गईं। उन्होंने किसी भी सियासी सवाल का जवाब नहीं दिया।
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