लखनऊ। गैस की किल्लत से अब छोटे रोजगारों पर बड़ा असर दिखने लगा है। खानपान के काम से जुड़े रेहड़ी-पटरी वाले, मझोले किस्म के ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों के सामने रोजी रोटी का संकट गहराता जा रहा है। चूल्हा न जल पाने से आमदनी जीरो हो गई है। ऐसे में मजबूरन धीरे-धीरे अब तक की जमा पूंजी भी खत्म होने लगी है। हजारों छोटे रोजगारों और उनके साथ जुड़े कामगारों को गृहस्थी चलाने की चिंता सताने लगी है।
चौक की 10-12 दुकानें चार दिन बाद भी बंद
चौक का आधी रात तक गुलजार रहने वाला चरक चौराहा फिलहाल चार दिन से वीराने में है। यहां एक लाइन से 10-12 दुकानें बंद हैं। बीच में इक्का-दुक्का दुकानें खुलीं भी, लेकिन गैस की किल्लत से ज्यादा दिन तक चूल्हे नहीं जल सके। सन्नाटे में दुकान के शटर का रंगरोगन करते मिले कारीगर अमर ने बताया कि गैस नहीं मिल है तो कैसे खोलें। हर दिन आने वाले सैकड़ों ग्राहक लौट जा रहे हैं। हम लोग भी अब दुकान की धुलाई और सफाई में लगे हैं।
पूड़ी से कुल्चे पर आए, दाम भी बढ़ाए
राणा प्रताप मार्ग पर सड़क किनारे पूड़ी-पराठा की दुकान लगाने वाले रमेश कश्यप ने बताया कि सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। थोड़ी गैस थी, तो उससे पराठे बना रहे हैं। भट्ठी लगाकर काम कर रहे हैं। लागत बढ़ी है तो पराठे पर 5 रुपये प्रति पीस रेट बढ़ाए हैं। वहीं, थोड़ी दूर पर ही पूड़ी-सब्जी की दुकान पर ग्राहकों की भीड़ दिखी। दुकानदार ने बताया कि बड़ी मुश्किल से महंगे दाम पर गैस मिली है तो पूड़ी-सब्जी के दाम 10 रुपये प्रति प्लेट बढ़ा दिए हैं।
गैस संकट।
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