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केजीएमयू में 6 नई जांचे शुरू, दिल समेत इन मरीजों को मिली राहत, यहां देखें- फीस

Wed, 16 Oct 2019 04:46 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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केजीएमयू ने छह नई जांचें शुरू की हैं। इससे ब्रेन ट्यूमर, दिल व अन्य रोगों के मरीजों को राहत मिली है। ओपीडी में आने वाले करीब 20 फीसदी मरीजों को ये जांचें करवाने के लिए निजी पैथोलॉजी के चक्कर काटने पड़ते थे। खास बात यह है कि इन जांचों की फीस एसजीपीजीआई के बराबर रखी गई है।

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केजीएमयू की ओपीडी में रोजाना आठ से 10 हजार मरीज आते हैं। यहां करीब 45 सौ बेड हैं। हर विभाग में पांच से 10 मरीज स्ट्रेचर पर भर्ती किए जाते हैं। यहां कई जरूरी जांचें नहीं हो पाती थी। इसके लिए मरीजों को निजी पैथोलॉजी जाना पड़ता था, जहां दो से तीन गुना अधिक शुल्क पड़ता था।

विभागों के डॉक्टरों की मांग को देखते हुए केजीएमयू प्रशासन ने पैथोलॉजी विभाग की केमिकल पैथोलॉजी लैब में छह जांचें शुरू करने का फैसला किया है। पैथोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. वाहिद अली ने बताया कि नई जांचों में हार्ट से जुड़ी सीके टोटल व सीके एमबी शामिल है।
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इसी तरह ब्रेन ट्यूमर और मोटाबोलिक डिसऑर्डर से जुड़ी बीमारियों की जानकारी से संबंधित ग्रोथ हार्मोन, इंसुलिन लाइक ग्रोथ फैक्टर और एसीटीएस की जांच शुरू की गई है। इसी तरह प्रत्यारोपण के दौरान होने वाले इंफेक्शन से जुड़ी टार्कोलिमस जांच भी नियमित कर दी गई है।

दिल के मरीजों के लिए जरूरी सीके टोटल, सीके एमबी जांच

प्रतीकात्मक तस्वीर
    जांचें                                                     शुल्क
सीके टोटल, सीके एमबी                             250-250 रुपये
टार्कोलिमस                                             1100 रुपये
एसीटीएच,  ग्रोथ हार्मोन, इंसुलिन लाइक ग्रोथ फैक्टर  800 रुपये (प्रत्येक)

लारी कार्डियोलॉजी में रोजाना सात से आठ सौ मरीज आते हैं। करीब सौ से ज्यादा भर्ती रहते हैं। इसमें 20 फीसदी में सीके टोटल और सीके एमबी जांच की जरूरत पड़ती है। इससे हार्ट मसल्स के डैमेज होने की जानकारी मिलती है। खास तौर से दूसरी बार अटैक होने पर यह जांच जरूर कराई जाती है।

सीके टोटल के जरिये हाई और लो रिस्क के बारे में भी जानकारी मिल जाती है। दोनों जांचों का शुल्क ढाई-ढाई सौ रुपये रखा गया है। यह जांच दो साल पहले भी शुरू की गई थी, लेकिन माहभर बाद ही किट न मिलने से बंद कर दी गई थी। अब इसे फिर से शुरू किया गया है।
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एसीटीएच, ग्रोथ हार्मोन, इंसुलिन लाइक ग्रोथ फैक्टर को समझें

प्रतीकात्मक तस्वीर
टार्कोलिमस से प्रत्यारोपण कराने वालों को फायदा
टार्कोलिमस एक तरह से इम्यूनो टेस्ट एजेंट होता है। इससे लिवर व किडनी प्रत्यारोपण के दौरान मरीज और डोनर के इम्यून सिस्टम की जानकारी मिलती है। इसके आधार पर दोनों को दवाओं की डोज निर्धारित की जाती है। लिवर प्रत्यारोपण शुरू होने के बाद केजीएमयू में इस जांच को शुरू किया गया है। खास बात यह है कि यह जांच अन्य किसी भी चिकित्सा संस्थान में नहीं है। इसकी फीस 1100 रुपये रखी गई है।

डॉ. वाहिद अली ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर और लंग ट्यूमर के मरीजों की एसीटीएच जांच कराई जाती है। इससे ब्रेन में हार्मोन्स की स्थिति का आकलन किया जाता है। इसी तरह जिन बच्चों एवं वयस्कों की बढ़ोत्तरी नहीं होती है, उनमें ग्रोथ हार्मोन की जांच होती है। इनकी मसल्स, हड्डी, ब्रेन की स्थिति कमजोर रहती है।

इन दोनों टेस्ट से ब्लड में हार्मोन्स की स्थिति परखी जाती है। ग्रोथ हार्मोन प्रोटीन पर आधारित पेप्टाइड हार्मोन है। यह कोशिकाओं की वृद्धि में सहायक होता है। बच्चों के वृद्धि विकारों के उपचार में कारगर है। इसी तरह इंसुलिन लाइक ग्रोथ फैक्टर के जरिये भी हार्मोन्स की क्षमता का आकलन किया जाता है। रोजाना 50 से सौ मरीजों को इसकी जरूरत पड़ती है। इन तीनों जांचों का मूल्य आठ-आठ सौ रुपये है।
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