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बालगृह के बच्चे की संदिग्ध हालात में मौत, दो दिन छिपाए रहे मामला

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बालगृह में मासूम की संदिग्ध हालात में मौत, दो दिन तक घटना छिपाए रहे अधिकारी
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हजरतगंज के प्राग नारायन रोड स्थित राजकीय बालगृह में रह रहे छह माह के दुधमुंहे मनीष की संदिग्ध हालात में मौत हो गई।
बालगृह के अधिकारी दो दिन तक पुलिस-प्रशासन से मामला छिपाए रहे। शुक्रवार सुबह शव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा तो हड़कंप मच गया।
इस बीच बालगृह के अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से क्रियाकर्म भी करा दिया। बच्चे की मौत के मामले में अधिकारियों की लापरवाही सामने आने के बाद मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं।
डीपीओ सुधाकर शरण पांडेय ने बताया कि मनीष महिला शरणालय में तीन महीने पहले आई संवासिनी का बेटा था।
बुधवार को बालगृह प्रशासन ने उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी मौत हो गई। इसके बाद से शव मर्च्युरी में रखा था।
बालगृह के सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार सुबह मर्च्युरी में सिपाही राजनारायण दुबे ने बच्चे का शव देखकर अधिकारियों को जानकारी दी, फिर पोस्टमार्टम हुआ।
इसके बाद बालगृह के जिम्मेदारों ने गुपचुप तरीके से शव का क्रियाकर्म करा दिया। अधीक्षिका मंजू वर्मा का कहना है कि बच्चे को दिल की बीमारी के अलावा मानसिक समस्या थी।
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उसका लगातार उपचार चल रहा था। बुधवार सुबह उल्टी-दस्त की शिकायत पर उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बीमारी से ही बच्चे की मौत हुई है।
सिर के पीछे लगी थी चोट, जमा था खून
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चे के सिर के पिछले हिस्से में चोट पाई गई है। सूत्रों ने बताया कि चोट के हिस्से में काफी खून जमा था। बच्चे के किसी ऊंची जगह से पीठ के बल गिरने की आशंका जताई जा रही है। पोस्टमार्टम दो चिकित्सकों के पैनल ने किया। डीपीओ का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद तय होगा कि बच्चे की मौत कैसे हुई? इसी आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
संतोषजनक नहीं किसी भी बच्चे की हालत
बालगृह शिशु में रखे गए किसी भी बच्चे की हालत संतोषजनक नहीं है। यहां देखरेख और रखरखाव के इंतजाम खराब हैं। बच्चों को पौष्टिक आहार की भी व्यवस्था नहीं है। बालगृह शिशु में आने वाले बच्चे वैसे भी शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं। यहां देखरेख व पौष्टिक खाने के अभाव में उनकी हालत और बिगड़ जाती है। सूत्रों का कहना है कि यहां के सभी बच्चों का वजन काफी कम है। मां का दूध न मिलने से ये कमजोर होते जाते हैं।
तीन माह पूर्व भी हुई थी एक की मौत
राजकीय बालगृह शिशु की लापरवाही लगातार जारी है। तीन माह पूर्व भी एक नवजात की मौत की सूचना को छिपाने का प्रयास किया गया था। इस बच्चे की मौत भी अस्पताल में उपचार के दौरान बताई गई।
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लिखित सूचना नहीं दी गई
सदस्य बाल कल्याण समिति सुधा रानी ने बताया कि नवजात की मौत की घटना की कोई लिखित सूचना नहीं दी गई। अंतिम संस्कार भी बिना अनुमति के करा दिया गया। इसमें सरासर बालगृह की अधीक्षिका व संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही है।
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