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लाखों रुपये में बांट रहे थे विधि की डिग्री, 6 गिरफ्तार, एलयू का बर्खास्त बाबू चलाता था गिरोह

Thu, 18 Apr 2019 03:28 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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पुलिस की गिरफ्त में आए फर्जी डिग्री बांटने वाले गिरोह के बदमाश - फोटो : amar ujala
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लखनऊ में बिना पढ़ाई और परीक्षा के ही विधि स्नातक बनाने का काला कारोबार चल रहा था। जालसाजों केइस गिरोह ने डेढ़ लाख रुपये प्रति सेमेस्टर (यानी नौ लाख रुपये में छह सेमेस्टर) की दर से डिग्री देने का दावा करता था। पुलिस ने बुधवार को इस गिरोह का पर्दाफाश किया। गिरोह को लखनऊ विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग से बर्खास्त बाबू बाबू खिरोधन प्रसाद उर्फ गंगेश चलाता था।
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पुलिस के हत्थे गिरोह के छह सदस्य चढ़े। इनके पास से मार्क्सशीट, परीक्षा विभाग का गोपनीय दस्तावेज, स्कैनर, प्रिंटर, आठ मोबाइल , एक कार और नकदी सहित कई सामान बरामद हुआ। पुलिस ने सभी जालसाजों को जेल भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक, अभी चार सदस्य फरार है।

जिनकी भूमिका इस गिरोह में महत्वपूर्ण है। फरार आरोपियों में लविवि के कुछ कर्मचारी भी शामिल हैं। पुलिस इनकी तलाश कर रही है। अपर पुलिस अधीक्षक ट्रांसगोमती अमित कुमार के मुताबिक, जानकीपुरम सेक्टर-एफ निवासी सौरभ यादव ने मंगलवार को हसनगंज थाने में तहरीर दी कि उनके साथ विधि स्नातक में प्रवेश के नाम पर कुछ लोगों ने जालसाजी की है।
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प्रवेश के नाम पर डेढ़ लाख रुपये लिए गए। बिना परीक्षा दिलाए ही पहले सेमेस्टर का अंकपत्र पकड़ा दिया गया। पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की। पड़ताल में सामने आया कि गिरोह बनाकर  फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।

जालसाजों से बरामद किया गया सामान

इसका सरगना गुडंबा के कल्याणपुर का खिरोधन प्रसाद है,  उसके गिरोह में एक दर्जन से अधिक सदस्य है, जो लाखों रुपये लेकर विधि व अन्य व्यावसायिक फर्जी डिग्रियां देते हैं। आरोपियों की निशानदेही पर जाली डिग्री बनाने के सामान सहित कई दस्तावेज हाथ लगे हैं।

14 फर्जी अंकपत्र, 6 ब्लू टेबुलेशन चार्ट, दो सादे लिफाफे, जिन पर परीक्षा नियंत्रक का मोनोग्राम और सील लगी है। परीक्षा नियंत्रक के दो सादे लेटर पैड, लखनऊ विश्वविद्यालय के दो फर्जी अंकपत्र, लैपटॉप, स्कैनर, आठ मोबाइल,बाइक, स्कूटी, कार व 7600 रुपये। टेबुलेशन चार्ट के आधार पर जालसाज फर्जी अंकपत्र तैयार करते है, जिससे किसी को यह न लगे कि अंकपत्र व डिग्री फर्जी है।

ये चढ़े पुलिस के हत्थे
सरगना खिरोधन प्रसाद उर्फ गंगेश, गोसाईंगंज के अमेठी का दीवान सिंह, मड़ियांव फैजुल्लागंज का दीपक तिवारी उर्फ दीपू, ठाकुरगंज के निवाजगंज का नायाब हुसैन, सीतापुर के महमूदाबाद का रविंद्र प्रताप सिंह और हसनगंज खदरा का मधुरेंद्र पांडेय।

दस्तावेजों से हुआ नेटवर्क का खुलासा
अपर पुलिस अधीक्षक ट्रांसगोमती के मुताबिक बरामद दस्तावेजों से पता चला कि गिरोह का नेटवर्क काफी दूर तक फैला है। यह लखनऊ विश्वविद्यालय में ही नहीं, अवध विवि, अयोध्या, कानपुर विवि व दिल्ली विश्वविद्यालय तक था।

खंगाली जा रही कर्मचारियों की कुंडली

इन विश्वविद्यालयों के परीक्षा विभाग में गिरोह की मजबूत सेटिंग है। वहां से यह डिग्री के दस्तावेज निकालता है। उनके आधार अनुक्रमांक और अन्य कोड आवंटित कर डिग्री बनाता। पुलिस गिरोह से जुड़े चारों विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग के कर्मचारियों की कुंडली खंगाल रही है। आरोपियों के मोबाइल से मिले नंबरों की कॉल डिटेल रिपोर्ट मंगाई गई है।

हजारों को बांट चुके हैं जाली डिग्री
क्षेत्राधिकारी महानगर संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, गिरोह में दस सदस्य हैं। गिरोह अब तक हजारों को फर्जी डिग्री बांट चुका है। पकड़े गए सदस्यों ने पूछताछ में अब तक 300 युवकों को फर्जी डिग्री बांटने की बात कुबूली है। जालसाजों के पास से 250 डिग्री के दस्तावेज मिले, जिसे तैयार कर वह बांटने की तैयारी में थे। शातिर स्कैनर से नकली स्टांप पेपर भी तैयार करते थे। आरोपियों के पास से कई जाली स्टांप पेपर भी मिले हैं। ट्रेजरी से इसकी पड़ताल भी की जा रही है।

फर्जी डिग्री बांटने में गिरफ्तार हुआ था गंगेश
क्षेत्राधिकारी महानगर के मुताबिक गिरोह का सरगना खिरोधन डेढ़ दशक से भी अधिक समय से फर्जी डिग्री बांटने का काम कर रहा था। उसकी तैनाती लविवि में पहले संविदा पर थी। बाद में उसे नियमित किया गया था। विवि की फर्जी डिग्री बांटने में उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मुकदमे की आंच परीक्षा विभाग तक  पहुंची तो अधिकारियों ने खिरोधन को बर्खास्त कर दिया। वहीं, 2009 में पुलिस ने उसके खिलाफ गैंगेस्टर की कार्रवाई भी की। बर्खास्तगी के कुछ दिनों बाद उसे जमानत मिली। इसके बाद फिर इसी काम में लग गया। इस बार उसने अन्य विश्वविद्यालय में भी अपना नेटवर्क तैयार किया।

बर्खास्त होने के बाद वकालत करने लगा सरगना
जालसाजों के गिरोह के दो वकील मास्टर माइंड हैं। इसके अलावा एक डिग्री कॉलेज का प्राचार्य भी प्रमुख सदस्य है। पुलिस ने दो वकीलों और प्राचार्य को गिरफ्तार कर लिया है। प्रभारी निरीक्षक हसनगंज धीरज कुमार शुक्ला के मुताबिक जालसाजी के मामले में बर्खास्त होने के बाद खिरोधन ने वकालत शुरू की। गिरोह का दूसरा मास्टर माइंड मधुरेंद्र पांडेय है। खिरोधन और मधुरेंद्र के घर से ही सारा काम होता था। वहीं, रविंद्र प्रताप सिंह सीतापुर के महमूदाबाद स्थित सरदार सिंह महाविद्यालय के प्राचार्य पद पर चार साल से कार्यरत है।
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10-20 हजार में गोपनीय दस्तावेज देते हैं लविवि कर्मचारी

पुलिस के हाथ ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज लगे हैं, जो सिर्फ परीक्षा विभाग में ही मिलते हैं। इसे बाहर नहीं ले जाया जा सकता है, लेकिन गिरोह का नेटवर्क इतना मजबूत है कि ये दस्तावेज भी उनके हाथ लग गए। इसमें 6 ब्लू टेबुलेशन चार्ट शामिल हैं। मास्टर माइंड ने पूछताछ में बताया कि परीक्षा विभागों में तैनात कर्मचारी इस गोपनीय दस्तावेज को उन तक पहुंचाने के लिए 10 से 20 हजार रुपये लेते हैं।

लविवि के परीक्षा विभाग तक पहुंची पड़ताल
पुलिस के मुताबिक, फर्जीवाड़े का खेल विश्वविद्यालयों के परीक्षा विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से होता है। छह कर्मचारियों की निगरानी शुरू हो गई है। उनके और करीबियों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर हैं। गिरोह से ताल्लुक रखने वाले चार कर्मचारियों की तलाश की जा रही है, जो दो दिन से विश्वविद्यालय में नहीं दिखे।

इस टीम ने किया खुलासा
उपनिरीक्षक अभय कुमार सिंह, नजर इमाम, योगेंद्र कुमार, विनोद कुमार, संजय सिंह, मुख्य आरक्षी निजामुद्दीन अंसारी, धवन सिंह, रामनरेश कन्नौजिया, कांस्टेबल अमित कुमार यादव, सुनील सिंह व सुधीर सिंह ने गिरोह का खुलासा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एएसपी ट्रांसगोमती अमित कुमार ने टीम को पुरस्कृत करने की संस्तुति की है
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