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UP: पहलगाम हमले ने फिर कुरेदे कश्मीरी समाज के जख्म, बोले- कश्मीर लौटने के हमारे सपनों पर हमला हुआ है

Thu, 24 Apr 2025 04:25 PM IST
ishwar ashish अभिषेक सहज, अमर उजाला लखनऊ

सार

पहलगाम आतंकी हमले ने लखनऊ में बसे कश्मीरी समाज के पुराने जख्म हरे कर दिए। पानुन कश्मीर संस्था ने कहा कि यह हमला केवल पर्यटकों पर नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज और भारतीय एकता पर है।
 
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रवि कचरू, दीपक कचरू और हनी कक्कड़। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पहलगाम में हुई आतंकी घटना ने एक बार फिर से पूरे देश को दहला दिया है। लखनऊ में रहने वाले कश्मीरी समाज के पुराने जख्म हरे हो गए हैं। निर्दोष पर्यटकों की हत्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कश्मीरी समाज के लोगों ने कहा कि बार-बार आश्वासन के बावजूद भी कश्मीर में हालात ठीक नहीं हो पा रहे हैं। आखिर ऐसे हालात में हम कैसे अपने घरों की ओर वापसी कर सकते हैं।

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वर्ष 1989-90 में तकरीबन 150 परिवार कश्मीर में आतंकवादियों की दहशत के चलते लखनऊ आकर बस गए थे। जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 और 35ए के तहत दिए गए विशेष दर्जे को हटाने के बाद से उम्मीद जगी थी कि अब शायद वे घर वापसी कर सकेंगे। ...लेकिन इस बार पर्यटकों को निशाना बनाकर निर्मम हत्या करने की पहलगाम में हुई घटना ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

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धार्मिक कट्टरता और नफरत की पराकाष्ठा
पानुन कश्मीर संस्था, लखनऊ के सचिव रवि कचरू ने कहा कि पहलगाम में जिस तरह से आतंकी संगठन ने हिंदू पर्यटकों को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया, यह धार्मिक कट्टरता और नफरत की पराकाष्ठा है। हम इस अमानवीय और कायरतापूर्ण हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। यह हमला केवल कुछ व्यक्तियों पर नहीं था, बल्कि यह भारत की एकता, अखंडता और सहिष्णुता पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि पिछले 35 वर्षों से कश्मीरी हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचार और विस्थापन का अंत नहीं हो सका है। हमने सात बार विस्थापन का दर्द सहा है। किसी भी सरकार ने इस पीड़ा का स्थायी समाधान नहीं खोजा। हम समस्त देशवासियों से आग्रह करते हैं कि इस राष्ट्रघाती मानसिकता के विरुद्ध एकजुट होकर आवाज उठाएं। यह केवल शोक का समय नहीं, बल्कि लड़ाई का समय है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। हम लोग 1989-90 में अपना सब कुछ छोड़कर पलायन को मजबूर हुए थे और तब भी हमारी किसी ने नहीं सुनी।

'ये हमला नहीं बल्कि हिंदुओं के खिलाफ सुनियोजित नरसंहार था'

पानुन कश्मीर से जुड़े प्रवक्ता दीपक कचरू का कहना है कि पहलगाम में आतंकी हमले ने एक बार फिर कश्मीरी पंडितों के हृदय में ज्वालामुखी फोड़ दिया है। हमारे जख्म फिर से हरे हो गए हैं। इतने सारे पर्यटकों की नृशंस हत्या केवल एक हमला नहीं था, बल्कि यह हिंदुओं के खिलाफ सुनियोजित नरसंहार था, जैसा कि पहले भी होता रहा है। उन्होंने कहा कि यह हमारे उस सपने पर भी हमला है, जिसमें हम अपने पूर्वजों की भूमि पर लौटकर सम्मानपूर्वक जीवन जीने की कल्पना करते हैं।

दीपक कचरू ने कहा कि हमारा घर, जमीन और मंदिर होने के बावजूद हम वहां जा नहीं सकते, क्योंकि अगर वहां सेना और सुरक्षाबलों के जवान भी सुरक्षित नहीं हैं तो एक सामान्य कश्मीरी हिंदू कैसे अपने बच्चों को लेकर अपनी मातृभूमि में लौटेगा। हर चुनाव में हमें वादे मिले लेकिन हकीकत में न कोई ठोस योजना बनी, न कोई स्थायी समाधान।

आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने की बात होती है पर आतंकवादी खुलेआम हिंदुओं को चुन-चुनकर मार रहे हैं और द रेजिस्टेंस फ्रंट जैसे संगठन खुलेआम जिम्मेदारी ले रहे हैं। हम जिंदा इंसान हैं, जिनकी पीड़ा तीन दशकों से अनदेखी की जा रही है। यह पूरे हिंदू समाज की अस्मिता की लड़ाई है। अगर आज भी हम चुप रहे, तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा।
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पानुन कश्मीर संस्था की मांगें

हमले के दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए।
कश्मीर में आतंकवाद की जड़ों को समाप्त करने के लिए निर्णायक सैन्य और राजनीतिक कदम उठाए जाएं।
कश्मीरी हिंदुओं की सुरक्षित वापसी और पुनर्वास के लिए ठोस और समयबद्ध योजना घोषित की जाए।
- घाटी में हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए विशेष बलों की तैनाती की जाए।
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