पानुन कश्मीर से जुड़े प्रवक्ता दीपक कचरू का कहना है कि पहलगाम में आतंकी हमले ने एक बार फिर कश्मीरी पंडितों के हृदय में ज्वालामुखी फोड़ दिया है। हमारे जख्म फिर से हरे हो गए हैं। इतने सारे पर्यटकों की नृशंस हत्या केवल एक हमला नहीं था, बल्कि यह हिंदुओं के खिलाफ सुनियोजित नरसंहार था, जैसा कि पहले भी होता रहा है। उन्होंने कहा कि यह हमारे उस सपने पर भी हमला है, जिसमें हम अपने पूर्वजों की भूमि पर लौटकर सम्मानपूर्वक जीवन जीने की कल्पना करते हैं।
दीपक कचरू ने कहा कि हमारा घर, जमीन और मंदिर होने के बावजूद हम वहां जा नहीं सकते, क्योंकि अगर वहां सेना और सुरक्षाबलों के जवान भी सुरक्षित नहीं हैं तो एक सामान्य कश्मीरी हिंदू कैसे अपने बच्चों को लेकर अपनी मातृभूमि में लौटेगा। हर चुनाव में हमें वादे मिले लेकिन हकीकत में न कोई ठोस योजना बनी, न कोई स्थायी समाधान।
आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने की बात होती है पर आतंकवादी खुलेआम हिंदुओं को चुन-चुनकर मार रहे हैं और द रेजिस्टेंस फ्रंट जैसे संगठन खुलेआम जिम्मेदारी ले रहे हैं। हम जिंदा इंसान हैं, जिनकी पीड़ा तीन दशकों से अनदेखी की जा रही है। यह पूरे हिंदू समाज की अस्मिता की लड़ाई है। अगर आज भी हम चुप रहे, तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा।
- हमले के दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए।
- कश्मीर में आतंकवाद की जड़ों को समाप्त करने के लिए निर्णायक सैन्य और राजनीतिक कदम उठाए जाएं।
- कश्मीरी हिंदुओं की सुरक्षित वापसी और पुनर्वास के लिए ठोस और समयबद्ध योजना घोषित की जाए।
- घाटी में हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए विशेष बलों की तैनाती की जाए।