यूपी की पुलिस किस तरह से बेपरवाह है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने सीता अपरहण की रिपोर्ट नहीं लिखी।
पुलिस के अत्याचारों से आमजन किस कदर डरे-सहमे व प्रताड़ित हैं, इसकी बानगी सोमवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी में नजर आई, जहां ‘युवरंग महोत्सव’ के अंतर्गत अन्तर्विद्यालयी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें स्टडी हॉल के छात्र-छात्राओं ने ‘सीता अपहरण केस’ नाटक का मंचन किया।
डॉ. प्रेम जनमेजय के लिखे इस नाटक का निर्देशन आशा बली ने किया। कहानी कुछ यूं शुरू होती है कि सीता का अपहरण हो जाता है और भगवान राम रिपोर्ट लिखाने थाने जाते हैं। पर, रोजमर्रा के ढर्रे पर चलने वाली पुलिस रिपोर्ट लिखने से इनकार कर देती है और राम पर सवालों की बौछार कर देती है।
खैर, लक्ष्मण सीता को खोज लेते हैं। यह बताने का प्रयास किया गया कि भगवान राम और लक्ष्मण सच्चाई के प्रतीक हैं। लेकिन पुलिस अमानुषिकता का प्रतिबिम्ब। मंच पर ऐश्वर्या सिंह, चैतन्य मोहन, सर्वज्ञ, प्रखर अविष द्विवेदी, अक्षत्र, आयुष, अमन और यशोवर्धन ने अभिनय किया।
जबकि गायन में अरुंधती, इशिता, जयति, मानवी, जूही, अनुष्का, अनुज्ञा और रितिका रमन व नृत्य में खुशबू, रानी, एंजिल रॉबिन और निधि रहीं।
‘सीता अपहरण केस’ के बाद महोत्सव की दूसरी प्रस्तुति लखनऊ पब्लिक कॉलेज गोमतीनगर के बच्चों की रही। उन्होंने ‘भटकल’ नाटक मंचित किया, जिसका निर्देशन दुर्गा वर्मा ने किया।
नाटक में स्कूली लाइफ दिखाने का प्रयास किया गया, जिसमें कैसे गलत संगत में पड़कर भटक जाते हैं और जब परिवार उनका विरोध करते हैं तो असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती है। छह वर्ष की ही उम्र में नूरी की मां उसे छोड़कर चली जाती है। पिता उसका पालन-पोषण करते हैं। एक बार नूरी पिता को बगैर बताए दोस्तों के साथ पार्टी में जाती है। जहां पर उसके दोस्त उसे नशा कराते हैं। इस पर जब पिता नूरी को डांटते हैं।