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इस अनाथालय की अधीक्षिका को डीएम ने किया बर्खास्त, लगे थे गंभीर आरोप

Sat, 10 Sep 2016 05:24 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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डेमो
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लगातार आदेशों की अवहेलना, अनाथ बच्चों के हितों से खिलवाड़ के आरोप सिद्ध होने पर श्रीराम औद्योगिक अनाथालय की अधीक्षिका रुचि त्रिपाठी को डीएम ने उनके पद से बर्खास्त कर दिया है। रुचि पर अनधिकृत तौर पर 11 बच्चों को गोद दिए जाने समेत कई गंभीर आरोप लगे थे। 
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जांच में वे सब सच साबित हुए  अधीक्षिका की बर्खास्तगी को शुक्रवार को अनाथालय प्रबंधन समिति ने अपनी बैठक में अनुमोदित किया, जिसमें डीएम सहित विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी बतौर अनाथालय पदाधिकारी शामिल थे।

अपने आदेश में अनाथालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष व जिलाधिकारी सत्येंद्र सिंह ने कहा है कि कदाचार के गंभीर आरोपों के संबंध में रुचि त्रिपाठी को 15 अगस्त 2016 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। 
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उन्हें सात दिन में इनका जवाब देना था लेकिन उन्हाेंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। 18 अगस्त को उन्हाेंने एक पत्र भेजकर अनियमितताओं से जुड़ी फाइलों की ही कॉपी मांग ली। उन्हें इन फाइलों की 1091 पेज की कॉपियां दी गईं, जिस पर 23 अगस्त को उन्होंने सात दिन का और समय मांगा।

इसे भी दिया गया। 29 अगस्त को समय सीमा खत्म हो गई और त्रिपाठी ने 2 सितंबर को अपने जवाब दिए हैं। डीएम ने कहा कि उन्होंने ने कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया, आपराधिक कृत्य किए, निरंकुशता से काम किया और अपने हितों के लिए कार्यालय के अभिलेख भी गायब करवाए। 

उन्हें कर्तव्यहीन, अकर्मण्य, निष्क्रिय बताते हुए उनकी सत्यनिष्ठा हो संदेहास्पद बताया गया है। आदेश में जिलाधिकारी ने कहा कि उन्हें पद पर बनाए ररखना संस्था के हित के खिलाफ होगा। ऐसे में उन्हें संस्था की सेवा से निष्कासित किया जाता है।
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पद पर बनाए रखना संस्था के हित के खिलाफ

डेमो - फोटो : amar ujala
ये हैं आरोप
बिना अनुमति 11 बच्चे गोद दे दिए
आरोप है कि बर्खास्त शिक्षिका ने 11 बच्चों राधा, मास्टर राजा, अप्सरा, गौरी, अनन्य, वर्षा, मनीषा, मीनाक्षी, शिवी, केतकी और प्रतीक (शिवा) को दित्तक ग्रहण इकाई की अनुमति लिए बिना गोद दे दिया।

त्रिपाठी की सफाई और परिणाम : रुचि का कहना था कि उसने दत्तक ग्रहण समिति सदस्यों से फोन पर लिए मौखिक अनुमति ली थी। डीएम ने इसे झूठा और काल्पनिक जवाब माना। कहा कि सभी बच्चों को अनधिकृत तौर पर गोद दिया गया है। 

नौ बच्चों का कुछ पता ही नहीं
आरोप था कि अनाथालय से भागे नौ बच्चों की सूचना बाल कल्याण समिति, पुलिस थाना अध्यक्ष और अनाथालय के प्रभारी सदस्य को नहीं दी गई। रिजवान, संगीता, विजय सैनी, बिटलवा, मुकेश, शिवानी, गुफरान, पंकज और पूजा गायब हो गए, वे कहां गए, किसी को पता नहीं है।

सफाई और परिणाम : त्रिपाठी ने कहा कि इन बच्चों में से कुछ के भागने की सूचना अलीगंज थाने में दी गई थी, कई दफा एफआईआर नहीं लिखी गई, कई दफा पीली पर्ची दी गई। डीएम ने इस तर्क को सही नहीं माना। 

अनाथालय में गौशाला खोल दी
अनाथालय के निरीक्षण के दौरान महिला एवं बाल कल्याण विभाग की सचिव ने पाया कि यहां गौशाला चलाई जा रही है और कैंपस में कारें पार्क हो रही हैं।

सफाई और निर्णय : रुचि ने कहा कि कैंपस में दो गाएं यहां के कर्मचारी भंडारी द्वारा उनके आने के पहले से पाली जा रही थी। इन गायों का एक लीटर दूध यहां के पदाधिकारियों को भी जाता था। दूसरी ओर अपनी कार की पार्किंग वे अधीक्षिका होने केनाते कर रही थीं और बाकी कारें आंगतुकों की थीं।

 जांच में भंडारी नाम को कोई कर्मचारी नहीं मिला। कार पार्किंग पर डीएम ने कहा कि डीएम को यहां आने पर अपनी गाड़ी कैंपस के बाहर खड़ी करनी पड़ती है, जबकि वे यहां की प्रबंध समिति के अध्यक्ष हैं। ऐसे में त्रिपाठी ने निजी लाभ के लिए अनाथालय कैंपस में व्यावसायिक पार्किंग शुरू कर दी थी। 
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