बैंकिंग से जिले की अर्थव्यवस्था का पता चल जाता है। जिस शहर में बैंकिंग जितनी मजबूत होगी, वहां का कारोबारी माहौल भी उतना ही मजबूत होगा। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति को बैंकों की ओर से सौंपी गई जमा-ऋण अनुपात की रिपोर्ट के मुताबिक संत कबीर नगर, चित्रकूट और श्रावस्ती के बैंकों में सबसे कम धन जमा है। लेकिन इन जिलों में जमा के अनुपात में लोन अच्छा खासा लिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक संत कबीर नगर जिले के बैंकों में 3000 करोड़, चित्रकूट में 3200 करोड़ और श्रावस्ती के बैंकों में सिर्फ 2000 करोड़ रुपये ही जमा हैं जो प्रदेश के किसी जिले के बैंक में जमा सबसे कम रकम है। इन तीन जिलों के बैंकों में कुल 8200 करोड़ रुपये हैं, लेकिन ऋण 6400 करोड़ का बांट दिया है जो जमा का 70 फीसदी से ज्यादा है। जबकि ऋण-जमा अनुपात 40 से 50 फीसदी आदर्श माना जाता है। संभल के बैंकों में 3300 करोड़, कासगंज में 3400 करोड़ और महोबा के बैंकों में 3400 करोड़ रुपये जमा हैं। इसी फेहरिस्त में बलरामपुर और ललितपुर भी हैं।
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अमीरी में मात दे रहे लखनऊ, गौतमबुद्धनगर और कानपुर
रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर और कानपुर के बैंक अमीरी में सभी को मात दे रहे हैं। लखनऊ के बैंकों में 2.16 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जमा हैं। इसी तरह गौतमबुद्ध नगर में 1.52 लाख करोड़ और कानपुर के बैंकों में 85 हजार करोड़ रुपये जमा हैं।
प्रयागराज, मुरादाबाद, आगरा, मेरठ, वाराणसी और गाजियाबाद के बैंकों की स्थिति भी मजबूत है। इन जिलों के बैंकों में औसतन 50 हजार करोड़ रुपये हैं। यही नहीं इन जिलों में लोन का अनुपात भी औसतन 45 फीसदी है। पीलीभीत और खीरी में लोन लेने वालों की संख्या का अनुपात पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा है। यहां बैंकों में जमा की तुलना में औसतन 80 फीसदी ऋण के रूप में वितरित है।