एलर्जी का समय पर इलाज जरूरी है। समय पर इलाज न होने से शरीर के दूसरे हिस्सों में दिक्कत होने लगती है। प्रदेश की एक तिहाई आबादी को एलर्जी की समस्या है। ये जानकारी एराज मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को एलर्जी, आस्थमा एंड इम्यूनोथेरेपी अपडेट विषय पर आयोजित चर्चा में कॉलेज के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने दी।
उन्होंने बताया कि एलर्जी एक सामान्य समस्या है। एलर्जी ग्रेनाइटिस से पीड़ित मरीज को लगातार छींके आने के साथ नाक बहती रहती है जिसका कारण जेनेटिक होता है। शरीर में इम्यूनो ग्लोबनि ई-टाइप पार्टिकल्स के बढ़ने पर एलर्जी की समस्या तेजी से बढ़ती है।
एलर्जी से ग्रसित मरीज की हिस्ट्री जानना जरूरी है। एराज मेडिकल कॉलेज में इस मौके पर एलर्जी क्लीनिक का उद्घाटन डायरेक्टर जनरल मेडिकल एजुकेशन डॉ. वीएन त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टॉक्सोलॉजी रिसर्च के निदेशक डॉ. आलोक धवन, इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी अस्थमा एंड अप्लाइड इम्यूनोलॉजी के सचिव डॉ. एबी सिंह, कॉलेज की डायरेक्टर एकेडमिक डॉ. फरजाना मेहंदी, प्रधानाचार्य डॉ. सावित्री ठाकुर, केजीएमयू के पल्मोनरी विभाग के डॉ. संतोष कुमार, सिविल के डॉ. एनबी सिंह समेत कई दूसरे डॉक्टर मौजूद रहे।
प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि एलर्जी से पीड़ित मरीजों की जांच के लिए स्किन टेस्ट, ब्लड टेस्ट और डबल ब्लाइंड चैलेंज टेस्ट जरूरी होता है। कई बार इस जांच में पता चलता है कि मरीज को मन की बीमारी थी जो उसे परेशान कर रही थी।
डॉ. एसएम गौड़ ने बताया कि सामान्य एलर्जी एन्जियो एडिमा होती है जिसमें कुछ खाने के बाद होंठ सूज जाते हैं। व्यक्ति कुछ भी खाता है तो सूजन आने के साथ उसमें जलन होने लगती है। ऐसे रोग से पीड़ित व्यक्ति को बिना देर किए डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।