जमीन के नाम पर जालसाजी करने वाले शाइन ग्रुप ऑफ कंपनीज ने लोगों को क्रिप्टो करेंसी के सब्जबाग दिखाकर भी ठगा था।
छह महीने पहले जो स्काई ओशियन नामक कंपनी खोली गई थी उसका आईटी सेल का काम बृजमोहन सिंह व अंकित कुमार ही देखते थे।
कंपनी को जल्दी मोटा मुनाफा दिलाने के लिए स्काई ओशियन टोकन (एसओटी) नामक क्रिप्टो करेंसी की भी लॉन्चिंग की गई।
ग्रुप के सीएमडी राशिद नसीम के इशारे पर दोनों जालसाजों ने सुभाष तुकाराम और फैजान अंसारी के साथ मिलकर ठगी का कारोबार शुरू किया।
कंपनी ने महज छह महीने में लोगों के 50 करोड़ से अधिक का निवेश करा दिए। एसटीएफ के मुताबिक, इन क्रिप्टो करेंसी की संख्या करीब 9 करोड़ थी। हालांकि, फर्जी होने के चलते यह पूरी नहीं बिक पाई थी।
एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक अनिल सिसोदिया के मुताबिक शाइन सिटी ग्रुप के खिलाफ लखनऊ में 279 से अधिक मुकदमे हैं। यह आंकड़ा पूरे प्रदेश में करीब 2500 से ऊपर है।
इतने ज्यादा मुकदमे दर्ज होने के बाद शाइन सिटी ग्रुप का सीएमडी राशिद नसीम अपने परिवारीजनों के साथ देश छोड़ दिया। हालांकि उसने कुछ माह पहले 80 निवेशकों को बृजमोहन समेत दुबई बुलाकर भव्य आयोजन किए थे।
इसी बीच बुधवार को एसटीएफ की टीम ने विभूतिखंड इलाके से चार लोगों को दबोच लिया। पकड़े गये ठगों में स्काई ओशियन कंपनी का एमडी झारखंड रांची का रहने वाला बृजमोहन कुमार सिंह, बुलंदशहर निवासी अंकित कुमार, झारखंड गढ़वा निवासी मो. फैजान अंसारी और महाराष्ट्र के शोलापुर का रहने वाला सुभाष तुकाराम देवकते शामिल हैं।
एसटीएफ के मुताबिक, गिरोह पूरा काम ऑनलाइन करता था ताकि कोई दस्तावेज पुलिस या अन्य जांच एजेंसियों के पास न पहुंच सके।
एसटीएफ ने चारों के पास से बरामद लैपटॉप की पड़ताल की तो उसमें एक से डेढ़ महीने का रिकॉर्ड मिला। पूछताछ में बताया कि वह अक्सर एक से दो महीने तक लैपटॉप प्रयोग करने के बाद नया खरीद लेते थे।
क्रिप्टो करेंसी को नहीं मिली किसी एक्सचेंज से मान्यता, बिकते कहां
राशिद नसीम द्वारा जारी करेंसी को दुनिया के किसी भी एक्सचेंज से मान्यता नहीं मिली थी। नतीजतन जिन लोगों ने इसे खरीदा था वो बेचते कहां। ऐसे निवेशकों की एक बड़ी रकम फंस गई। ध्यान रहे कि 2018 में भी प्रयागराज निवासी राशिद ने क्वीन क्वाइन और किंग क्वाइन लॉन्च किए थे। उस समय भी किसी एक्सचेंज में मान्यता नहीं मिलने से ये क्वाइन कहीं बिक ही नहीं पाए। तब भी निवेशकों को करोड़ों की चपत लगाई गई थी।
जानिए क्या है क्रिप्टो करेंसी, क्यों है जोखिम...
क्रिप्टो करेंसी किसी मुद्रा का एक डिजिटल रूप है। यह किसी सिक्के या नोट की तरह ठोस रूप में आपकी जेब में नहीं होता है। यह पूरी तरह से ऑनलाइन होती है और बिना किसी नियमों के इसके जरिए व्यापार होता है। इस रिस्की करेंसी को कोई सरकार या कोई विनियामक अथॉरिटी जारी नहीं करती है। इन दिनों भारतीय बड़ी संख्या में क्रिप्टो करेंसी खरीद रहे हैं, लेकिन इसे लेकर कोई आधिकारिक डाटा नहीं है। वे पर्याप्त लाभ कमाने के मौके को छोड़ना नहीं चाहते हैं। वहीं, भारत सरकार ने संसद में क्रिप्टो करेंसी बिल पेश करने का फैसला लिया है लेकिन इस विधेयक के बारे में जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं है। उल्लेखनीय है कि 2018 में आरबीआई ने क्रिप्टो करेंसी के लेन-देन का समर्थन करने को लेकर बैंकों और विनियमित वित्तीय संगठनों को प्रतिबंधित कर दिया था। लेकिन निवेशक कोर्ट चले गए तो प्रतिबंध हटा दिया गया।