शिया उलमा महासम्मेलन में तीन तलाक का मुद्दा प्रमुखता से उठा। उलमा ने बिना गवाह के तीन तलाक को हराम बताया। इसके साथ ही, उलमा बढ़ते आतंकवाद से चिंतित भी नजर आए। उन्होंने आतंकवाद से लड़ने को अपना पहला धार्मिक कर्तव्य बताया।
शनिवार को दुबग्गा स्थित मदरसा अबुतालिब के उद्घाटन के अवसर पर विदेशी उलमा भी जमा हुए। डा. कल्बे सादिक ने कहा कि मौजूदा वक्त में शिक्षा और इल्म के दरवाजे को मजबूती से थामने की जरूरत है।
मौलाना ने मदरसा अबुतालिब के लिए मौलाना सैफ अब्बास नकवी की तारीफ करते हुए कहा कि यह कदम कौम की तरक्की का रास्ता है। हैदराबाद के इमाम ए जुमा मौलाना सैयद जफरयाब हैदर ने एक बार में तीन तलाक का सख्त विरोध करते हुए इसके बहिष्कार की बात कही।
उनका कहना था कि तीन तलाक बगैर गवाह व बिना रुजू के हराम है। मौलाना ने कहा कि वैसे तो एक बार तलाक कहने से ही तलाक हो जाता है, लेकिन तीन तलाक को इसलिए बनाया गया कि तलाक देने वाले को सोचने समझने का समय मिल जाए। एक वक्त में तीन बार तलाक तलाक तलाक कह कर औरत को छोड़ना हराम है।
'तीन तलाक मजहब के नाम पर महिला उत्पीड़न'
इस अवसर पर मुरादाबाद के सुन्नी उलमा सूफी सज्जादा नशीन हबीबुल रहमान ने कहा कि अहलेबैत की सीरत पर अमल करने से ही मुसलमान अपनी बुराइयों से पाक हो सकते हैं।
तलाक देने से पहले तलाक के कॉन्सेप्ट को समझना जरूरी है। तीन तलाक मजहब के नाम पर सीधा महिला उत्पीड़न है।
पूरी दुनिया में बढ़ते आतंकवाद पर चिंता
महासम्मेलन में मौजूद विदेश से आए उलमा ने दुनिया में बढ़ रहे आतंकवाद पर चिंता जताते हुए कहा कि हमारा पहला धार्मिक कर्तव्य है कि अहलेबैत का दामन थाम कर आतंकवाद से सख्ती से निपटा जाए।
ईरान के शहर कुम से आए मौलाना शेख मेहंदी माअश करबलाई का कहना है कि मुसलमान हजरत अबुतालिब और हजरत अली के किरदार को देखें और उनके रास्ते पर चलें तो सारी बुराइयां दूर हो जाएंगी।
बिना इल्म के तीन तलाक से मसला उलझा
कुवैत के संसद सदस्य सालेह अहमद आशूर ने कहा कि बिना इल्म के मुसलमान तीन तलाक के मसले में उलझा हुआ है। तीन तलाक एक बार में नहीं दिया जा सकता। ऐसा करना गलत है, हराम है।
वहीं इराक से आए शेख मोहम्मद अब्बास, कुवैत से आए अल हुसैन खलील अलईद, सालिम नज्म, मौहम्मद मुखलिस व नासिर यूसुफ कमाल ने भी अपनी तकरीर में आतंकवाद को इंसानियत का दुश्मन बताया। साथ ही, मदरसा कॉलेज को इल्म का दरवाजा करार दिया।
तलाक से बचना है तो शादी में न करें जल्दबाजी
उलमा ने मुसलमानों से तलाक के मामले से बचने के लिए शादियों में जल्दबाजी न करने को कहा है। मौलाना सैयद जफरयाब हैदर ने कहा कि मौजूदा समय में बढ़ रहे तलाक के पीछे चट मंगनी पट ब्याह है। सोच-समझ कर शादियां करनी होंगी।
'गलत आमदनी बताकर शादी करने से बढ़ रहे तलाक'
मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि शादी की बुनियाद झूठ से रखी जा रही है। इसलिए तलाक के मामले बढ़े हैं। शादी के लिए लड़के की आमदनी गलत बताकर झूठ बोला जाता है। इसका नतीजा तलाक होता है।
उलमा सम्मेलन में साफ हुआ मसला ए तलाक
1. गुस्से में तलाक नहीं दिया जा सकता।
2 तलाक देते वक्त गवाह व तलाक के जानकार उलमा का होना जरूरी
3. एक बार में तीन तलाक कहने से तलाक नहीं होता, तलाक के लिए एक बार कहना ही काफी है।
4. तलाक के बीच रुजू (40 दिन का समय अंतराल) जरूरी है। इसके बाद उलमा व गवाह के सामने दूसरा तलाक दे सकते हैं।
5. दूसरे तलाक के बाद भी वक्त दिया जाता है। एक बार में तीन बार तलाक तलाक तलाक हराम है।