हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर मनोज कुमार गुप्ता हत्याकांड में बसपा के पूर्व विधायक शेखर तिवारी सहित 9 अभियुक्तों की उम्रकैद की सजा बरकार रखी।
अदालत ने शेखर तिवारी की पत्नी विभा तिवारी की भी ढाई साल की सजा बरकरार रखी है। मृत इंजीनियर की पत्नी शशि गुप्ता ने फैसले पर संतोष जताया और इसे न्याय की जीत करार दिया है।
बसपा शासन काल में 24 दिसंबर 2008 की आधी रात को औरेया के पूर्व विधायक शेखर तिवारी ने साथियों के साथ मनोज गुप्ता को घर में यातनाएं देकर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी थी।
इस मामले में लखनऊ सत्र न्यायालय ने मई 2011 को शेखर तिवारी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
‘साबित हुआ, ईमानदारी की सदा जीत होती है’
अपने फैसले में जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा और जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने मनोज गुप्ता की पत्नी शशि गुप्ता के बयान को पूरी तरह मुतमईन करने वाला बताया और बचाव में दी गई सभी दलीलों को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि शशि गुप्ता उन्हें गलत फंसा रही हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वह उन सभी गवाहियों से पूरी तरह संतुष्ट है, जिनके आधार पर सत्र न्यायालय ने सजा सुनाई थी।
मनोज गुप्ता की पत्नी शशि गुप्ता और उनके बेटे प्रतीश ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला राहत देने वाला है।
उन्होंने कहा कि जो चला गया उसे वापस तो नहीं पाया जा सकता लेकिन हत्यारों को उम्रकैद होने से यह साबित हुआ कि ईमानदारी की सदा जीत होती है।
‘आज भी रात में 3 बजे जाग उठती हूं’
अमर उजाला से बातचीत में प्रतीश ने कहा कि उनके पिता ने ईमानदारी से काम करते हुए जान दी। उन्होंने कहा ,‘मेरे पिता शहीद हुए थे और प्रदेश सरकार इसे इसी रूप से मान्यता दे।’
फैसले की खुशी के बीच भी कुछ उदास नजर आ रहीं शशि गुप्ता कहती हैं कि पति की याद हर पल जेहन में रहती है।
बीते 6 सालों में वे कई दफा रात को 3-4 बजे जाग उठती हैं। 24 दिसंबर की आधी रात हुई घटनाएं दिमाग में कौंधने लगती हैं। उसे याद करके सिहर आज भी सिहर उठती हैं।
दिवंगत इंजीनियर मनोज कुमार गुप्ता की पत्नी शशि और बेटा प्रतीश गुप्ता।
चंदा न मिलने से खफा था शेखर
मनोज गुप्ता ने बसपा सुप्रीमो और तत्कालीन सीएम मायावती के जन्मदिन पर चंदा देने से इन्कार किया ता, इससे शेखर तिवारी खफा था। इसी वजह से उसने साथियों के साथ मनोज गुप्ता की उनके घर में हत्या कर दी थी।