ट्रैक पर काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि मरम्ममत का काम चल रहा था, इसी दौरान सामने से हाईस्पीड ट्रेन आ गई। चूंकि, ट्रेन रफ्तार में थी इसलिए उपकरण छोड़कर भागना पड़ा। वहीं रेलवे अधिकारियों ने बताया कि मजदूर काम कर चुके थे और उपकरण गलती से ट्रैक पर छूट गए थे।
लोको पायलट से कहासुनी
ट्रैक पर मरम्मत कार्य चलने के बावजूद शताब्दी एक्सप्रेस को रोका नहीं गया। जब ट्रेन उपकरणों पर से गुजरी और लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्र्रेक लगाया तो यह रुकी। इसके बाद नाराज यात्रियों व काम करने वाले मजदूरों की लोको पायलट से कहासुनी तक हुई। हालांकि, पिपरसण्ड रेलवे स्टेशन मास्टर मो. असलम ने मारपीट की बात से इनकार कर दिया। उन्होंने इसके बारे में जानकारी से इन्कार कर दिया।
पहली बार नहीं हुई ऐसी लापरवाही
ट्रैक की मरम्मत के दौरान लापरवाही बरतने का यह पहला मामला नहीं है। इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही इससे पहले बाराबंकी रेलखण्ड पर भी उजागर हो चुकी है। यहां पटरियों को बदलने का काम चल रहा था और इसकी जानकारी लोको पायलट को नहीं दी गई थी। जब ट्रेन गुजरी तो पटरी टूट गई और रेलवे प्रशासन सकते में आ गया। हालांकि, कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ था। वहीं, पिपरसण्ड का मामला भी गंभीर है। ट्रैक पर उपकरण पड़े होने से बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।
उपकरण छूटने की बात बेबुनियाद
मामले पर उत्तर रेलवे के सीनियर डीओएम अजीत सिन्हा का कहना है कि ट्रैक पर उपकरण छूटने की बात बेबुनियाद है। पिपरसण्ड में पटरियों की मरम्मत के लिए सुबह 11.20 से दोपहर सवा एक बजे तक ब्लॉक लिया गया था। जहां सेफ्टी के लिए बैनर लगा हुआ था और 30 किमी प्रति घंटे का कॉशन था। शताब्दी यहां पहुंचने से पहले ही रुक गई थी।’