कनाट प्लेस की तर्ज पर सीजी सिटी में बन रहे शान-ए-अवध को एलडीए बेचने की तैयारी कर रहा है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 500 करोड़ रुपये आंकी गई है। संपत्ति की कास्टिंग प्रक्रिया फाइनल होने के बाद इसे ई-ऑक्शन के जरिए बेचा जाएगा।
वीसी प्रभु एन सिंह खुद अपनी निगरानी में शान-ए-अवध की कॉस्टिंग करा रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द इसे बेचा जा सके। इस संदर्भ में बृहस्पतिवार को भी वीसी ने वित्त विभाग, इंजीनियरिंग विभाग और कॉस्टिंग विभाग की बैठक बुलाई थी।
बैठक में तय हुआ कि किन-किन खर्चों को शामिल कर एलडीए एब तक बन चुके शान-ए-अवध की वैल्यू तय करे। एलडीए के वित्त नियंत्रक राजीव कुमार सिंह ने बताया कि अब तक के आकलन के मुताबिक यह वैल्यू करीब 500 करोड़ रुपये बन रही है।
कॉस्टिंग विभाग से भी इसके लिए आकलन कराया जा रहा है। वैल्यू फाइनल होने के बाद ही इसे ऑक्शन के लिए रखा जाएगा। जल्दी ही इस बारे में फैसला होगा।
निर्माण पहले ही हो चुका बंद
- फोटो : डेमो
शान-ए-अवध का निर्माण एलडीए पहले ही बंद करा चुका है। करीब दो महीने से साइट पर कोई नया काम नहीं हो रहा है। करीब चार मंजिला निर्माण में से अब तक बेसमेंट, भूतल, प्रथम तल का निर्माण हो चुका है।
वहीं दूसरे और तीसरे तल का निर्माण पूरा होना बाकी है। कुल निर्माण लागत शान-ए-अवध की 478.95 करोड़ रुपये प्रस्तावित है। एलडीए के लिए काम कर रही एनसीसी अब तक 40 प्रतिशत सिविल वर्क खत्म कर चुकी है।
एलडीए अगर नए वित्तीय वर्ष में शान-ए-अवध को बेचने में सफल रहता है तो एकमुश्त बड़ा बजट आ जाएगा। एलडीए को इससे वित्तीय संकट खत्म होने की उम्मीद है।
वहीं आर्थिक संकट खत्म करने के लिए ही एलडीए ने सीजी सिटी की 16 दूसरी संपत्तियों की भी वैश्विक ई-नीलामी में लगाया है। यह ई-ऑक्शन 26 मार्च को होना है।
बड़ा सवाल : आखिर क्यों फेल हुआ प्रोजेक्ट
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28 मार्च को भी एलडीए की बाकी बड़ी कॉमर्शियल उपयोग की संपत्तियों का ई-ऑक्शन होगा। एलडीए पहली बार ई-ऑक्शन कर रहा है, जिसमें प्राधिकरण में आकर बोली लगाने की जरूरत नहीं होगी।
प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर एलडीए ने शान-ए-अवध प्रोजेक्ट का निर्माण 2016 में शुरू कराया। इसके निर्माण को शुरू करने के लिए प्रदेश सरकार ने खुद 100 करोड़ रुपये दिए। वहीं हुडको से 200 करोड़ रुपये के लोन के लिए भी सहयोग किया।
इस प्रोजेक्ट पर एलडीए ने निर्माण तो शुरू कराया, लेकिन यहां विकसित होने वाली संपत्तियों को बेचने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। प्रोजेक्ट को लॉन्च कर बुकिंग शुरू करने तक में अधिकारी विफल रहे।
इस बीच एलडीए की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। प्रोजेक्ट के निजी हाथों में जाने की असली वजह एलडीए और आवास विभाग में रहे आला अधिकारी खुद हैं।
इस तरह तय हो रही कीमत
- 225 करोड़ रुपये जमीन की कीमत, 13.50 एकड़ में शान ए अवध का फेज-1
- 175 करोड़ रुपये करीब टैक्स, ब्याज, प्रशासनिक फीस, बाह्य विकास शुल्क पर खर्च