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'एसएमएस व वॉट्सएप से तलाक गैर शरई, हलाला पर प्रतिबंध लगे'

Sun, 06 Nov 2016 08:51 PM IST
सैफ हैदर नकवी/अमर उजाला, लखनऊ
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ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर - फोटो : amar ujala
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ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने कहा है कि मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शरीयत में केंद्र की दखलअंदाजी बर्दाश्त के काबिल नहीं है। कॉमन सिविल कोड किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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वे जल्द ही तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट में ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड का पक्ष दाखिल करेंगी।

शाइस्ता ने शनिवार को यूपी प्रेस क्लब में पत्रकारों से यह बात कही। एक बार में तीन तलाक का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि फोन, एसएमएस व वॉट्सएप से तलाक गैर शरई हैं।

इन तरीकों से तलाक देने वालों व एक पक्षीय तलाक कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाने की जरूरत है, लेकिन इसे कुरान की रोशनी में बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हलाला शरीयत का हिस्सा नहीं है। इस पर पूरी पाबंदी हो और महिलाओं को खुला लेने का पूरा अधिकार मिले।
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दूसरी व तीसरी शादी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। शाइस्ता ने कहा कि कॉमन सिविल कोड को जबरन थोपा नहीं जा सकता।
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शरीयत का पालन न करने वाले को मिले सख्त सजा

उनकी वकील डॉ. चंद्रा राजन ने कहा कि हिंदू विवाह एक्ट की तर्ज पर मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाया जाए, ताकि शरीयत का सही तरह से पालन न करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।

तलाकशुदा महिलाओं को मिले वक्फ बोर्ड से आर्थिक सहायता
शाइस्ता ने कहा कि तलाक के बाद महिलाओं को उनका हक नहीं मिल पाता और वे दर-दर की ठोकरें खाती हैं। ऐसे में शरीयत के मुताबिक वक्फ बोर्ड तलाकशुदा महिलाओं के लिए बैतुलमाल धार्मिक, आर्थिक कोष की व्यवस्था करे।

दारुलकजा में महिला काजी की भी हो नियुक्ति
शाइस्ता ने कहा कि शरई अदालत दारुलकजा में पुरुष काजी के साथ महिला काजी की भी नियुक्ति होनी चाहिए, ताकि महिला अपना पक्ष रखने में घबराए नहीं। इससे दारुलकजा में केवल पुरुषों का पक्ष सुनकर तलाक पर मुहर लगाने की साजिश रोकी जा सकेगी।
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