ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर
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ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने कहा है कि मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शरीयत में केंद्र की दखलअंदाजी बर्दाश्त के काबिल नहीं है। कॉमन सिविल कोड किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वे जल्द ही तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट में ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड का पक्ष दाखिल करेंगी।
शाइस्ता ने शनिवार को यूपी प्रेस क्लब में पत्रकारों से यह बात कही। एक बार में तीन तलाक का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि फोन, एसएमएस व वॉट्सएप से तलाक गैर शरई हैं।
इन तरीकों से तलाक देने वालों व एक पक्षीय तलाक कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाने की जरूरत है, लेकिन इसे कुरान की रोशनी में बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हलाला शरीयत का हिस्सा नहीं है। इस पर पूरी पाबंदी हो और महिलाओं को खुला लेने का पूरा अधिकार मिले।
दूसरी व तीसरी शादी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। शाइस्ता ने कहा कि कॉमन सिविल कोड को जबरन थोपा नहीं जा सकता।