संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान की इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों को 24 घंटे के भीतर विभाग में शिफ्ट करना होगा। इमरजेंसी में बेड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने सभी विभागाध्यक्षों के साथ हुई बैठक में यह निर्देश दिया है।
एसजीपीजीआई की इमरजेंसी में बांदा के भूतपूर्व सांसद भैरव प्रसाद मिश्रा के पुत्र प्रकाश मिश्रा को इलाज न मिलने से मौत के बाद माहौल बदला हुआ है। निदेशक खुद इमरजेंसी में इलाज की व्यवस्था सुधारने के लिए प्रयासरत हैं। इसके तहत उन्होंने विभागाध्यक्षों के साथ इसके विकल्पों पर बात की। हालांकि, कई विभागों ने इमरजेंसी के सभी मरीजों को वार्ड में लेने पर आपत्ति भी जताई। उनका कहना था कि अगर वार्ड के बेड इमरजेंसी वाले मरीजों से ही भर जाएंगे तो फिर ओपीडी के मरीज कैसे भर्ती हो पाएंगे। फिलहाल इस निर्देश का पालन करने को कहा गया है।
ब्राड स्पेशियलिटी विभाग न होने से खड़ी होती है समस्या
एसजीपीजीआई में इमरजेंसी के मरीजों के भर्ती न होने के पीछे एक वजह इसकी आधारभूत संरचना भी है। असल में संस्थान में ज्यादातर विभाग सुपर स्पेशियलिटी के हैं। मेडिसिन समेत कई सामान्य विभाग यहां पर नहीं हैं। ऐसे में इमरजेंसी के मरीजों को शिफ्ट करने में समस्या आती है। संस्थान में सुपर स्पेशियलिटी के विभागों में भर्ती होने वाले मरीज लंबे समय तक भर्ती रहते हैं। इसकी वजह से भी संस्थान में उपलब्ध बेड की संख्या कम रहती है। संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन के अनुसार इमरजेंसी के सभी मरीजों को इलाज मिल सके, इसके लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। पूरा प्रयास है कि हर मरीज को इलाज मिल सके।