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राजधानी के विस्तारित क्षेत्र में अभी तीन साल तक पानी-सीवर की सुविधा मिलने के आसार नहीं

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लखनऊ। सीमा विस्तार के बाद नगर निगम सीमा में आए 88 गांवाें के 75 प्रतिशत इलाके में अभी पानी व सीवर की लाइन नहीं है। इस काम के लिए अब तक शासन से बजट भी नहीं मिला है। बजट मिलने के बाद भी करीब तीन साल का समय काम पूरा होने में लगेगा। ऐसे में अभी तीन साल यहां के लोगों को यह सुविधा नहीं मिलने वाली है।
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विस्तार के बाद जो नए गांव नगर निगम सीमा में शामिल हुए हैं, उनमें एलडीए की जानकीपुरम विस्तार, गोमती नगर विस्तार और कुछ निजी आवासीय समितियों को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी सीवर व पेयजल की पाइप लाइन नहीं है। ऐसे इलाकों की तादाद करीब 75 प्रतिशत है। सीवर-पेयजल पाइप लाइन का प्रोजेक्ट तो बन गया है, लेकिन इसके लिए बजट नहीं है। ऐसे में इसकी डीपीआर बनाने का काम तक शुरू नहीं हुआ है। स्मार्ट सिटी योजना में बिछाई जा रही सीवर लाइन का काम करीब तीन साल से चल रहा है, लेकिन यह अब तक पूरा नहीं हुआ है, जबकि यह काम 88 गावों के क्षेत्र से आधा ही है। इसी तरह लोहिया पथ पर हैदर कैनाल नाले पर एसटीपी बनाने का काम भी दो साल से अधिक समय से चल रहा है, जो अब तक पूरा नहीं हो सका है।
काम शुरू होने के बाद तीन साल लगेंगे
नगर निगम सीमा में जो 88 गांव आए हैं, वहां सीवर की सुविधा के लिए 50-50 एमएलडी क्षमता केदो एसटीपी बनाने के साथ् 2446.74 किमी सीवर लाइन बिछाने की जरूरत है। इसी तरह पेयजल के लिए 2000 किलो लीटर क्षमता की 30 पानी की टंकियां बनाने के साथ 2386.82 किमी पाइप लाइन बिछानी होगी। जानकारों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद कम से कम तीन साल का समय काम पूरा होने में लगेगा, जबकि अभी तक प्रोजेक्ट सिर्फ कागज पर ही है।
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अभी शहर के अंदर यहां भी नहीं पेयजल पाइप लाइन
सीमा विस्तार के बाद बढ़े 88 गांव के अलावा शहर के अंदर पुरानी कॉलोनियों के बीच भी अभी तमाम पुराने मोहल्ले व गांव गांव ऐसे हैं, जहां जलकल की पाइप लाइन नहीं बिछी है। इसमें गोमती नगर व इंदिरा नगर जैसी पॉश कॉलोनियों के बीच आने वाले नवाबपुरवा गांव, ग्वारी गांव, गदरिया पुरवा, डिगडिगा गांव, गुलाम हुसैन का पुरवा, विजयीपुर गांव, रिशाहा, बिहारीपुर, उजरियांव, बेल्हा गांव, जुगौली गांव, कचंनपुर मटियारी, अमराई गांव, खरगापुर, गाजीपुर गांव, पानी गांव व टेकपुरवा आदि शामिल हैं।
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