सूबे के सात शहरों को राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) स्लम फ्री बनाएगा। इसके लिए योजना तैयार कर ली गई है। यानी इन शहरों में मलिन बस्तियों के स्थान पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) व निम्न आय समूह (एलआईजी) श्रेणी के फ्लैट बनाए जाएंगे। इन फ्लैटों का आवंटन उन्हें किया जाएगा, जो योजना से संबंधित बस्ती में रह रहे हैं।
केंद्र सरकार की राजीव आवास योजना के तहत यूपी के 16 शहरों में आवास निर्माण का कार्य शुरू होना था। इसके लिए लखनऊ, रायबरेली, कानपुर नगर, कन्नौज, गोरखपुर, आगरा, मुजफ्फरनगर, मेरठ, फीरोजाबाद, मुरादाबाद, रामपुर, वाराणसी, मथुरा, गाजियाबाद, अलीगढ़ व झांसी का चयन किया गया था।
इनमें से कुछ शहरों की मलिन बस्तियों में आवास निर्माण का कार्य शुरू भी करा दिया गया, लेकिन मई- 2015 में अचानक इस योजना को बंद कर दिया गया। नतीजतन कुछ शहरों में धन आवंटन के बावजूद काम शुरू नहीं हो पाया। ऐसे शहरों में गाजियाबाद, अलीगढ़, गोरखपुर, झांसी व फीरोजाबाद शामिल हैं।
फ्लैट में होंगी सारी सुविधाएं
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लिहाजा राज्य सरकार ने इन पांच शहरों के साथ ही शाहजहांपुर व सहारनपुर की मलिन बस्तियों में भी सड़क, बिजली व पानी जैसी अवस्थापना सुविधाओं से युक्त फ्लैट बनाने का निर्णय लिया है। इसकी जिम्मेदारी सूडा को सौंपी गई है। अब सूडा ने इन सात शहरों को ‘स्लम फ्री’ बनाने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया है।
ये शहर होंगे स्लम फ्री
गाजियाबाद, अलीगढ़, गोरखपुर, झांसी, फीरोजाबाद, सहारनपुर व शाहजहांपुर।
अनुमोदन के लिए केंद्र को भेजा जा रहा एक्शन प्लान
मामले पर सूडा के निदेशक शैलेंद्र सिंह का कहना है कि स्लम फ्री सिटी बनाने की योजना का एक्शन प्लान तैयार करने के लिए दिल्ली की संस्था विजन ईआईएस कंसल्टिंग प्रा. लि. का चयन किया गया है। उसके साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हो गए हैं। गोरखपुर, झांसी और फीरोजाबाद के लिए एक्शन प्लान तैयार हो चुका है।
अलीगढ़ और गाजियाबाद में सर्वे का काम चल रहा है। जबकि सहारनपुर व शाहजहांपुर जल्द ही सर्वे का काम शुरू करा दिया जाएगा। केंद्र सरकार की मदद से यह योजना पूरी होगी, इसलिए एक्शन प्लान को अनुमोदन के लिए केंद्र को भेजा जा रहा है।