राजधानी में 1915 स्कूली-शैक्षणिक वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से 183 वाहन 15 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके हैं। फिर भी कंडम वाहन दौड़ रहे हैं। 258 वाहन ऐसे हैं, जिनकी फिटनेस व परमिट या फिर दोनो खत्म हो चुके हैं। 122 वाहन वे हैं, जिनकी फिटनेस नहीं है और 208 के परमिट खत्म हो गए हैं। 72 वाहन ऐसे हैं, जिनकी फिटनेस व परमिट दोनों नहीं है और 58 में सिर्फ फिटनेस नहीं है, पर परमिट है। राजधानी में सिर्फ 1474 वाहन ही चलने लायक हैं।
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- वाहन का रंग पीला हो। आगे विद्यालय बस या वैन लिखा होना चाहिए। स्कूल का नाम, ड्राइवर का विवरण वाहन पर लिखा हो।
- वैन में क्रॉस शीशे लगे हों, दरवाजे के लॉक अच्छे होने चाहिए।
- सीट बेल्ट, आपात स्थिति के लिए अलार्म, घंटी या सायरन हो।
- फर्स्ट एड बॉक्स व अग्निशमन यंत्र हो।
- सीएनजी वाहन में सिलिंडर के ऊपर सीट न हो।
आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय ने बताया कि अनफिट स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। चेकिंग के दौरान ऐसे वाहनों के पकड़े जाने पर वाहन मालिकों व स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर तक की होगी।