स्वामी प्रसाद मौर्या के बाद एक और वरिष्ठ नेता ने बसपा छोड़ने का ऐलान कर दिया है। बसपा के संस्थापक सदस्य आरके चौधरी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेस करके पार्टी छोड़ने की घोषणा की। पार्टी के महासचिव और दिग्गज राष्ट्रीय नेता चौधरी ने भी टिकट की खरीद-फरोख्त पर गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा, बसपा अध्यक्ष मायावती की लगातार बदलती कार्य प्रणाली से तंग आकर मैंने बहुजन समाज पार्टी छोड़ दी है।
आरके चौधरी ने भी मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगाया और कहा, उन्हें धन उगाही का शौक है। बीएसपी अब रियल स्टेट कंपनी बनती जा रही है। मायावती चाटुकारों के कहने पर फैसले लेती हैं। उन्होंने कहा, बसपी टिकट बिक्री की मंडी बन चुकी है। कहा कि बसपा में भूमाफियाओं और ठेकेदारों को टिकट मिल रहे हैं। आरके चौधरी ने 11 जुलाई को समर्थकों की मीटिंग बुलाई है। मीटिंग के बाद वह अगली रणनीति का खुलासा करेंगे।
उन्होंने कहा कि गलत नीतियों और बिगडती कार्यशैली के कारण देश भर में पार्टी का ग्राफ दिनों दिन गिरता जा रहा है। पार्टी के तमाम अच्छे मिशनरी नेताओं ने आरोप लगाया और पार्टी छोड़ी लेकिन मायावती में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कांशीराम एक बार खुद कह चुके हैं कि मायावती को पैसा बटोरने की हवस है। मायावती ने कांशीराम के सामाजिक परिवर्तन आंदोलन को मटियामेट कर दिया है।
बता दें कि आरके चौधरी कांशीराम के साथी रहे हैं। उन्होंने कांशीराम के साथ मिलकर बसपा की नींव रखी थी। बसपा की स्थापना से पहले दलित समाज को जागरूक करने के अभियान में वह कांशीराम के साथ थे।
बसपा में मायावती का प्रभाव बढ़ने के साथ उन्हें 2001 में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इसके बाद वह 12 साल बाद 2013 में फिर से बसपा में शामिल हुए थे। चौधरी ने बीएस4 पार्टी छोड़कर बसपा ज्वॉइन की थी।