वर्ष 2013 में जब अमित शाह को प्रदेश का प्रभारी बनाकर भेजा गया तो उनके पक्ष में जो बात सबसे ज्यादा जाती थी, वह थी प्रदेश में पार्टी की दुर्दशा और गुटबाजी। विधानसभा में पार्टी के 50 से भी कम विधायक थे। लोकसभा में यूपी से सिर्फ 10 सांसद थे।
- प्रदेश में अध्यक्ष से लेकर पदाधिकारियों की भारी-भरकम टीम थी, लेकिन यह संदेश भी सार्वजनिक हो चुका था कि खींचतान और खेमेबाजी के चलते राज्य के किसी नेता के लिए पार्टी को एकजुट करके चुनावी मैदान में उतारना मुश्किल है। ऐसे में शाह जैसी कड़क छवि के नेता को यहां भेजा गया। ऊपर से उनकी पीठ पर उस समय प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित हो चुके नरेंद्र मोदी का हाथ और मोदी को प्रधानमंत्री बनवाने का संकल्प ले चुके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अप्रत्यक्ष भूमिका ने भी शाह को खूब ताकत दी।
- शाह ने इसका ठीक से इस्तेमाल किया और सबसे पहले प्रदेश के जमे-जमाए नेताओं को दूसरी भूमिका में पहुंचाने के साथ फैसलों में उनका हस्तक्षेप खत्म किया। वर्ष 2014 में वह प्रदेश में भाजपा के गठबंधन के साथ 70 से ज्यादा सांसद जिता ले गए तो प्रदेश के नेताओं के मुंह पर ताला लग जाना स्वाभाविक ही था।
शाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर ओम माथुर को प्रभारी बनाकर यूपी भेजा गया। वह शाह जितने प्रभावी तो नहीं दिखे, फिर भी प्रधानमंत्री मोदी की नजदीकी ने उनका कद बनाए रखा। इसकी एक वजह शाह का राष्ट्रीय अध्यक्ष होना था। शाह राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बावजूद प्रदेश के फैसलों में दखल रखते थे। एक तरह से यही माना जाता था कि फैसले उन्हीं के हैं। हालांकि इस परिस्थिति के चलते प्रदेश प्रभारी माथुर और प्रदेश में महामंत्री संगठन सुनील बंसल के बीच खींचतान की खबरें भी सार्वजनिक हुईं, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत ने इस पर पर्दा डाल दिया।
माथुर के बाद जेपी नड्डा प्रदेश प्रभारी बने और उनकी देखरेख में लोकसभा चुनाव हुआ। तब भी शाह ही एक तरह से यूपी से जुड़े फैसलों के केंद्र में रहे। पर, आज वह परिस्थिति नहीं है। प्रदेश में मजबूत सरकार और सुदृढ़ संगठन है। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह पिछड़े वर्ग के मजबूत नेता और प्रदेश सरकार में मंत्री रहे हैं।
प्रदेश में प्रभारी रहकर राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नड्डा खुद शाह की तरह राज्य के निर्णयों में भूमिका निभाते हैं। इसीलिए यह सवाल अहम हो जाता है कि ऐसे में राधामोहन सिंह की प्रभारी के रूप में प्रदेश में भूमिका क्या होगी।